MM Naravane : कौन हैं पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे और अप्रकाशित किताब में क्या है विवादास्पद?
MM Naravane : लोकसभा में हंगामे की वजह बनी जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब। जानिए कौन हैं पूर्व सेना प्रमुख, किताब में क्या लिखा है और क्यों मचा है राजनीतिक विवाद।
MM Naravane : लोकसभा में हाल ही में हुआ ज़ोरदार हंगामा पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद (एमएम) नरवणे की एक अप्रकाशित किताब को लेकर है। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में कारवां मैगज़ीन में प्रकाशित लेख के कुछ अंश पढ़ने की कोशिश की, जो कथित तौर पर जनरल नरवणे की आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ से जुड़े हैं।
सत्ता पक्ष ने अप्रकाशित किताब के अंश पढ़े जाने पर कड़ा ऐतराज़ जताया, जिसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।
क्या है किताब को लेकर विवाद?
राहुल गांधी का दावा है कि यह किताब जनरल नरवणे की संस्मरण आधारित रचना है, जिसे सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किताब में कुछ आपत्तिजनक नहीं है, तो उसके अंश पढ़ने से डर क्यों?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह किताब जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी, लेकिन भारतीय सेना द्वारा इसकी आधिकारिक जांच शुरू किए जाने के बाद प्रकाशन रोक दिया गया। प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस को निर्देश दिया गया था कि जांच पूरी होने तक किताब की हार्ड या सॉफ्ट कॉपी साझा न की जाए। रक्षा मंत्रालय भी इस प्रक्रिया में किसी स्तर पर शामिल बताया गया है।
कौन हैं जनरल मनोज मुकुंद नरवणे?
जनरल एमएम नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के 28वें प्रमुख रहे। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने दो बड़ी चुनौतियों का सामना किया – कोरोना महामारी और पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव।
प्रारंभिक शिक्षा: ज्ञान प्रबोधिनी स्कूल, पुणे
प्रशिक्षण: एनडीए खड़कवासला और इंडियन मिलिट्री एकेडमी
शिक्षा: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से एम.फिल.
पिता: वायु सेना अधिकारी
परिवार: पत्नी शिक्षिका, दो बेटियां
गलवान संघर्ष और रणनीतिक फैसले
जनरल नरवणे के कार्यकाल का सबसे अहम मोड़ जून 2020 का गलवान घाटी संघर्ष रहा। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने पारंपरिक रक्षात्मक नीति से आगे बढ़कर ‘ऑफेंसिव डिफेंस’ की रणनीति अपनाई। कैलाश रेंज पर टैंकों की तैनाती को सैन्य दृष्टि से बड़ा कदम माना गया, जिससे चीन पर रणनीतिक दबाव बना।
16 जून 2020 को 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने को जनरल नरवणे ने अपने करियर का “सबसे दुखद दिन” बताया था।
किताब के कौन-से हिस्से पहले ही सामने आ चुके हैं?
द इंडियन एक्सप्रेस और पीटीआई की रिपोर्टों के मुताबिक, किताब में गलवान झड़प, अग्निपथ योजना और 31 अगस्त 2020 की उस रात का ज़िक्र है जब एलएसी पर चीनी गतिविधियां तेज़ हुई थीं। उस रात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से हुई बातचीत का विवरण भी इसमें शामिल है।
यही अंश कारवां मैगज़ीन में प्रकाशित लेख का आधार बने, जिन्हें राहुल गांधी संसद में पढ़ना चाहते थे।
जनरल नरवणे की प्रमुख उपलब्धियां
- ‘मेक इन इंडिया’ के तहत 11,000 करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा प्रोजेक्ट
- एनडीए में महिला कैडेट्स की ऐतिहासिक एंट्री
- पूर्वी कमान और स्ट्राइक कोर का नेतृत्व
- ऑपरेशन पवन (श्रीलंका) में सेवा
- सेना मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित
जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब अब सिर्फ़ एक सैन्य संस्मरण नहीं, बल्कि सियासी बहस का केंद्र बन चुकी है। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर किताब में ऐसा क्या है, जिसे सार्वजनिक होने से रोका जा रहा है।



