Ghana Indian Sailors Return: घाना में फंसे 9 भारतीय नाविकों की सुरक्षित घर वापसी, भारतीय उच्चायोग के प्रयासों से मिला संकट से छुटकारा
करीब 142 दिनों तक घाना में फंसे रहे मर्चेंट नेवी के भारतीय क्रू मेंबर्स को कूटनीतिक प्रयासों के बाद अकरा से भारत रवाना किया गया।
Ghana Indian Sailors Return: घाना में पिछले कई महीनों से गंभीर संकट में फंसे मर्चेंट नेवी के नौ भारतीय नाविक आखिरकार सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं। अकरा स्थित भारतीय उच्चायोग के लगातार राजनयिक प्रयासों और घाना के संबंधित अधिकारियों के सहयोग से सभी नाविकों को 23 जुलाई 2026 को अकरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारत के लिए रवाना किया गया। इस सफल अभियान ने एक बार फिर विदेशों में संकटग्रस्त भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।
भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उसने मालवाहक जहाज एम.वी. रहाफ मून (M/V Rahaf Moon) के नौ भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की। ये सभी नाविक पिछले कई महीनों से घाना में फंसे हुए थे और कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे थे।
कई एजेंसियों के सहयोग से संभव हुई वापसी
उच्चायोग के अनुसार, घाना मैरीटाइम अथॉरिटी, घाना पोर्ट्स एंड हार्बर्स अथॉरिटी तथा इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (आईटीएफ) के सक्रिय सहयोग से सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद सभी भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित भारत रवाना किया गया।
उच्चायोग ने कहा कि यह अभियान विदेशों और समुद्र में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और अधिकारों की रक्षा के लिए भारत सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
क्या था पूरा मामला?
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला समुद्री क्षेत्र में ‘क्रू एबंडनमेंट’ का एक गंभीर उदाहरण था। ‘क्रू एबंडनमेंट’ उस स्थिति को कहा जाता है, जब जहाज का मालिक चालक दल को बिना वेतन, भोजन, आवश्यक संसाधनों या स्वदेश लौटने की व्यवस्था के छोड़ देता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंट किट्स एंड नेविस के ध्वज तले पंजीकृत मालवाहक जहाज एम.वी. रहाफ मून के मालिक ने 3 मार्च 2026 को घाना के तेमा बंदरगाह पर जहाज और उसके चालक दल को असहाय छोड़ दिया था।
चार महीने से नहीं मिला वेतन
जहाज पर कुल 12 सदस्य तैनात थे, जिनमें नौ भारतीय, दो अज़रबैजानी और एक तुर्की नागरिक शामिल थे। चालक दल को चार महीने से अधिक समय तक वेतन नहीं मिला, जिससे उनके सामने आर्थिक और मानवीय संकट खड़ा हो गया। सीमित संसाधनों और अनिश्चित भविष्य के बीच वे लंबे समय तक सहायता का इंतजार करते रहे।
करीब 142 दिनों तक चले इस कठिन दौर के बाद भारतीय उच्चायोग के हस्तक्षेप और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से आखिरकार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित अपने देश लौटने में सफल रहे।
विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार का जोर
घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि विदेशों में संकट में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारतीय मिशन लगातार सक्रिय रहते हैं। हाल के वर्षों में विभिन्न देशों से भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार ने कई राहत और निकासी अभियान सफलतापूर्वक संचालित किए हैं। घाना से नौ भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी भी उसी प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।



