adevertisment Adevertiisment banner

Election Commission of India: मतदाता सूची विवाद पर बोले गुलाम नबी आजाद, चुनाव आयोग के फैसलों पर उठाए सवाल

Election Commission of India: चुनाव आयोग को लेकर जारी बहस के बीच गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

Election Commission of India: देश में चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर चल रही बहस के बीच डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन मामलों में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विवाद सामने आए हैं, वहां विपक्ष की ओर से उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

चुनाव आयोग को लेकर क्या बोले आजाद?

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पिछले कई वर्षों से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि पहले इन आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं होते थे। लेकिन अब स्थिति अलग दिखाई दे रही है, क्योंकि चुनाव आयोग के भीतर से ही कुछ मुद्दों पर मतभेद की चर्चाएं सामने आई हैं।

उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के कुछ निर्णयों को लेकर चुनाव आयुक्तों ने अपनी चिंताएं दर्ज कराई थीं। आजाद के मुताबिक, जब किसी संवैधानिक संस्था के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आती है, तो उससे जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा स्वाभाविक हो जाती है।

मतदाता सूची विवाद पर जताई चिंता

आजाद ने विशेष रूप से मतदाता सूची से नाम हटाने के विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी क्षेत्र में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद चुनाव हुए हैं, तो उस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में उठ रही शंकाओं का समाधान होना जरूरी है ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहे।

विपक्ष की मांग पर क्या कहा?

DPAP प्रमुख ने कहा कि यदि विपक्ष दोबारा चुनाव कराने या मामले की विस्तृत जांच की मांग कर रहा है, तो उसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही होना चाहिए।

चुनाव आयोग का पक्ष भी आया सामने

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के भीतर विभिन्न मुद्दों पर सुझाव और राय व्यक्त करना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा है कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार आना असामान्य नहीं है और सभी फैसले निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत लिए जाते हैं।

क्यों बढ़ी है चर्चा?

हाल के दिनों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, फॉर्म-6 से जुड़े प्रावधानों तथा चुनावी डेटा प्रबंधन को लेकर कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं। इसी पृष्ठभूमि में गुलाम नबी आजाद का यह बयान राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गया है।

फिलहाल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी इस बहस पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

Related Articles

Back to top button