‘मोदी ने कॉल किया या नहीं’, ट्रम्प के सहयोगी के बयान से मची हलचल, जानिये क्या कहा?
ट्रम्प के सहयोगी के ‘मोदी ने कॉल नहीं किया’ वाले दावे से भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सवाल उठे हैं। जयशंकर-रूबियो की बातचीत के बाद आगे क्या होगा?
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता एक बार फिर गहरा गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक करीबी सहयोगी के उस दावे से राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मच गई, जिसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रम्प को कॉल न किए जाने के कारण भारत-अमेरिका ट्रेड डील फेल हो गई है। हालांकि भारत सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए साफ किया है कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अभी जारी है।
इस पूरे विवाद के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई बातचीत को द्विपक्षीय संवाद जारी रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
50 फीसदी टैरिफ के बाद भी अधर में ट्रेड डील
अमेरिका को भारतीय निर्यात पर 50 फीसदी तक टैरिफ बढ़ाए हुए लगभग पांच महीने हो चुके हैं। इनमें से आधे टैरिफ को राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर लगाई गई “पेनल्टी” बताया था। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस ट्रेड डील पर सहमति नहीं बन सकी है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता की औपचारिक शुरुआत पिछले साल मार्च-अप्रैल में हुई थी, जब फरवरी में बातचीत को हरी झंडी दी गई थी। लेकिन हाल के दिनों में ट्रम्प प्रशासन के कई विरोधाभासी बयानों ने तस्वीर को और धुंधला कर दिया है।
ट्रम्प के सहयोगी का दावा और भारत का खंडन
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने दावा किया कि संभावित ट्रेड डील इसलिए फेल हो गई क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रम्प को कॉल नहीं किया। इसके अलावा, ट्रम्प प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि एक ऐसा बिल आगे बढ़ रहा है, जिससे भारत पर टैरिफ 500% तक बढ़ाया जा सकता है।
भारत ने इन दावों को तुरंत खारिज करते हुए कहा कि ऐसी किसी बातचीत के विफल होने की बात सही नहीं है और द्विपक्षीय संवाद अलग-अलग स्तरों पर जारी है। भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के हालिया बयान ने भी संकेत दिया कि अमेरिका भारत को एक अहम रणनीतिक और आर्थिक साझेदार मानता है।
‘मोदी अच्छे आदमी हैं, लेकिन मैं खुश नहीं था’: ट्रम्प
हाल ही में एयर फोर्स वन में मीडिया से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, “मोदी एक अच्छे आदमी हैं। भारत मुझे खुश करना चाहता था। मोदी जानते थे कि मैं खुश नहीं था। और हमें उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ाने पड़ सकते हैं।”
ये बयान उस दावे के कुछ महीनों बाद आए, जिसमें ट्रम्प ने कहा था कि पीएम मोदी ने उन्हें रूस से तेल खरीद कम करने का आश्वासन दिया था। अगस्त 2025 में इसी मुद्दे को आधार बनाकर भारत पर अमेरिकी टैरिफ दोगुना कर दिए गए थे।
रूस से तेल खरीद बना बड़ा विवाद
अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से भारत-रूस ऊर्जा व्यापार को लेकर असंतोष जता रहा है। ट्रम्प प्रशासन का आरोप है कि इस व्यापार से रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए फंडिंग मिलती है। इसी कारण भारत पर टैरिफ को दबाव की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
500 फीसदी टैरिफ का खतरा कितना वास्तविक?
इस अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस प्रतिबंध बिल को हरी झंडी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून में ऐसे देशों पर कम से कम 500% टैरिफ लगाने का प्रावधान है, – जो रूसी यूरेनियम या पेट्रोलियम उत्पादों का व्यापार करते हैं।
हालांकि यह बिल अभी प्रस्ताव की स्थिति में है, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए इसे एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या?
एक तरफ ट्रम्प प्रशासन के सख्त बयान हैं, तो दूसरी तरफ जयशंकर-रूबियो जैसी उच्चस्तरीय बातचीत यह संकेत देती है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पूरी तरह पटरी से नहीं उतरी है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो सकता है कि क्या दोनों देश समझौते की ओर बढ़ते हैं या टैरिफ युद्ध और तेज होगा।



