माघ मेला 2026 : वसंत पंचमी पर टूटा महाकुंभ का रिकॉर्ड, 3.56 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान
माघ मेला 2026 में वसंत पंचमी पर संगम स्नान का नया रिकॉर्ड बना। 3.56 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, महाकुंभ-2025 का रिकॉर्ड टूटा।
प्रयागराज। माघ मेला 2026 में वसंत पंचमी के अवसर पर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि महाकुंभ के पुराने रिकॉर्ड भी टूट गए। चौथे प्रमुख स्नान पर्व पर शुक्रवार को संगम समेत गंगा और यमुना के सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भीड़ देखने को मिली। प्रशासन के अनुसार, माघ मेला क्षेत्र के 24 घाटों पर कुल 3.56 करोड़ श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया, जो कि महाकुंभ-2025 की वसंत पंचमी पर दर्ज 2.57 करोड़ के आंकड़े से कहीं अधिक है।
माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि गुरुवार रात से शुरू होने के कारण शुक्रवार तड़के से ही संगम तट पर स्नान का क्रम आरंभ हो गया। संगम नोज, वीआईपी घाट, दशाश्वमेध, झूंसी, अरैल और फाफामऊ जैसे प्रमुख स्नान क्षेत्रों में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। संगम नोज पर सबसे अधिक दबाव देखा गया।
भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। घाटों पर आरएएफ की तैनाती की गई, जबकि गंगा के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग कर स्नान क्षेत्र का दायरा बढ़ाया गया। जल पुलिस की नावें और स्टीमर लगातार गश्त करते रहे, जिन पर पीएसी के जवान और प्रशिक्षित गोताखोरों की टीमें मौजूद रहीं।
स्नान के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने घाटों पर पूजा-अर्चना, दीपदान और सूर्य को अर्घ्य भी दिया। प्रतिबंध के बावजूद कई घाटों पर श्रद्धालु जल में खड़े होकर पूजा करते नजर आए। संगम नोज और आसपास के इलाकों में लोगों ने अपने साथ लाया प्रसाद ग्रहण किया और तिलक-चंदन कराकर धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए। अक्षयवट मार्ग पर गोदान और दान-दक्षिणा के लिए भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
अक्षयवट और लेटे हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए दिनभर लंबी कतारें लगी रहीं। जयकारों और मंत्रोच्चार से पूरा मेला क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। प्रशासनिक अधिकारियों, जिनमें मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त, मेलाधिकारी और एसपी मेला शामिल रहे, लगातार क्षेत्र का निरीक्षण करते रहे।
कई श्रद्धालु ऐसे भी रहे जो कल्पवास नहीं कर सके, लेकिन तीन प्रमुख स्नान पर्वों – मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी पर स्नान कर संकल्प पूरा किया। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, ऐसे श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में रही, जिन्होंने डुबकी के बाद पूजा-अनुष्ठान और दान-पुण्य भी किया।
माघ मेला 2026 में वसंत पंचमी का यह ऐतिहासिक स्नान न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि भीड़ और व्यवस्थाओं के लिहाज से महाकुंभ के बराबर माना जा रहा है।



