Mysore Woman Suicide: 120 दिन तक नहीं मिला एक भी वीक ऑफ, सीनियर्स की प्रताड़ना से परेशान महिला ने दी जान; सुसाइड नोट से खुला मामला
मैसूर में 42 वर्षीय महिला कर्मचारी की मौत के बाद हड़कंप, कथित सुसाइड नोट में 4 महीने तक छुट्टी नहीं मिलने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप
Mysore Woman Suicide: कर्नाटक के मैसूर से कार्यस्थल पर कथित प्रताड़ना का एक गंभीर मामला सामने आया है। हिनाकल इलाके में एक मार्ट में प्रोडक्ट प्रमोटर के तौर पर काम करने वाली 42 वर्षीय महिला कर्मचारी नागेश्वरी की मौत के बाद सामने आए कथित सुसाइड नोट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला ने आरोप लगाया कि उसे करीब 120 दिनों तक एक भी साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया गया और कार्यस्थल पर ऐसी गलतियों के लिए भी परेशान किया जाता था, जिनसे उसका कोई संबंध नहीं था।
जानकारी के मुताबिक नागेश्वरी को PPMS एजेंसी के माध्यम से मार्ट में नौकरी मिली थी। परिवार का कहना है कि घटना से पहले करीब 15 दिनों से वह मानसिक रूप से परेशान थीं। उन्होंने घरवालों को बताया था कि कार्यस्थल पर उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया जा रहा है और काम को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
कथित सुसाइड नोट में नागेश्वरी ने दावा किया कि उन्हें लगातार काम कराया जाता था। उनका आरोप था कि करीब चार महीने तक उन्हें साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया गया। जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी छुट्टी लेने में भी परेशानी होती थी। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि बिना गलती के भी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें डांटा और परेशान किया जाता था।
कथित नोट में डॉली नाम की एक सुपरवाइजर का भी जिक्र किया गया है। महिला ने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर अपने साथ हो रहे व्यवहार को लेकर सवाल उठाने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
नागेश्वरी की मां रत्नाम्मा ने भी अपनी बेटी के मानसिक तनाव का जिक्र किया है। परिवार का कहना है कि नागेश्वरी पिछले कुछ समय से काफी परेशान थीं और उन्होंने घर पर काम से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया था। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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पुलिस के मुताबिक मामला मैसूर के विजयनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस महिला की मौत की परिस्थितियों के साथ-साथ कथित सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की भी जांच कर रही है। जांच में महिला के काम के घंटे, छुट्टियों का रिकॉर्ड, कार्यस्थल पर उसके वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध और नौकरी से जुड़े अन्य दस्तावेज अहम हो सकते हैं।
फिलहाल महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को जांच के बाद ही सही या गलत माना जा सकेगा। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कार्यस्थल पर वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और क्या कथित प्रताड़ना का महिला की मौत से कोई संबंध था।
इस घटना ने एक बार फिर कर्मचारियों के काम के घंटे, साप्ताहिक अवकाश और कार्यस्थल पर मानसिक दबाव जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। नागेश्वरी के परिवार को अब पुलिस जांच से उम्मीद है कि उनकी बेटी के साथ आखिरी दिनों में क्या हुआ था, इसकी पूरी सच्चाई सामने आएगी और अगर किसी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।



