हमलावर आते रहे, लेकिन सोमनाथ हर युग में फिर से स्थापित होता रहा : पीएम मोदी

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें आज भी सक्रिय हैं और मंदिर पर हुए हमलों को सिर्फ आर्थिक लूट नहीं कहा जा सकता।

वेरावल (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें आज भी देश में सक्रिय हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि अब वे तलवारों के बजाय “अन्य दुर्भावनापूर्ण तरीकों” का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर हुए बार-बार के हमलों को केवल आर्थिक लूट की कार्रवाई मानकर नहीं समझा जा सकता।

प्रधानमंत्री गुजरात के प्रभास पाटन में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन वर्ष 1026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया। पीएम मोदी ने कहा, “अगर सोमनाथ पर हमले सिर्फ धन लूटने के लिए होते, तो पहली बड़ी लूट के बाद ही यह सिलसिला रुक जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मंदिर पर बार-बार हमले किए गए, मूर्तियाँ तोड़ी गईं, उसका स्वरूप बदला गया, और फिर भी हमें यही पढ़ाया गया कि यह केवल लूट की घटना थी।”

उन्होंने आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद कुछ इतिहासकारों और राजनीतिक वर्गों ने आक्रमणों को “सफेदपोश” करने की कोशिश की और उन्हें सामान्य लूटपाट की घटनाओं के रूप में प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इससे सामूहिक स्मृति कमजोर हुई और नई पीढ़ियाँ आस्था के केंद्रों की रक्षा के लिए किए गए बलिदानों से कटती चली गईं।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “दुर्भाग्य से, आज भी वही ताकतें सक्रिय हैं जिन्होंने आज़ादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था।”
चार दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के समापन अवसर पर संतों, पुजारियों, जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि यह पर्व विनाश का नहीं, बल्कि निरंतरता और पुनर्निर्माण का उत्सव है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ हज़ार साल पहले हुए विनाश की स्मृति नहीं, बल्कि हज़ार साल की यात्रा और भारत के अस्तित्व व गौरव का उत्सव है।”

सोमनाथ के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मंदिर हार का नहीं, बल्कि बार-बार पुनर्निर्माण और विजय की गाथा है। उन्होंने कहा कि हमलावर आते रहे, लेकिन सोमनाथ हर युग में फिर से स्थापित होता रहा,”

प्रधानमंत्री ने आज़ादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय पुनर्निर्माण का विरोध हुआ था और 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पर भी आपत्तियाँ जताई गई थीं। उन्होंने नवानगर के तत्कालीन शासक जाम साहब दिग्विजयसिंहजी को भी इस परियोजना में सहयोग और सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के पहले अध्यक्ष के रूप में भूमिका निभाने के लिए श्रेय दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1951 में पूर्ण हुआ सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण राष्ट्रीय आत्म-सम्मान का प्रतीक बना और 2026 में इसके 75 वर्ष पूरे होना वर्तमान समारोहों को विशेष महत्व देता है।

सोमनाथ क्षेत्र में सरकार की पहलों का ज़िक्र करते हुए मोदी ने सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, केशोद हवाई अड्डे के विस्तार, अहमदाबाद-वेरावल वंदे भारत ट्रेन और तीर्थयात्रा सर्किट के विकास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी आस्था को याद रखते हुए आधुनिक बुनियादी ढांचे और तकनीक के माध्यम से भविष्य को भी सशक्त बना रहा है।

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प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक आत्मविश्वास को भारत की आर्थिक आकांक्षाओं से जोड़ते हुए कहा कि देश तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ जैसे विरासत स्थल “विकसित भारत” के लक्ष्य को नैतिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित शौर्य यात्रा में भी भाग लिया।

 

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