Ayodhya : बीजेपी में राम के नाम पर ‘पेटेंट वॉर’ – हिंदुत्व की नर्सरी पर कब्ज़े की अंदरूनी जंग!
Ayodhya : राम मंदिर आंदोलन के दिग्गज नेताओं की नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है। विनय कटियार और बृजभूषण शरण सिंह के बयानों से BJP के भीतर अयोध्या को लेकर ‘राम राजनीति’ की अंदरूनी जंग तेज हो गई है।
समीर शाही
Ayodhya : जिस ‘अयोध्या’के नाम पर भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली की सत्ता तक का सफ़र तय किया, आज वही अयोध्या पार्टी के भीतर सबसे खतरनाक सियासी युद्ध का अखाड़ा बनती दिख रही है। संकेत साफ हैं – बीजेपी में अब ‘राम’नहीं, बल्कि राम पर अधिकार यानी ‘पेटेंट’ की लड़ाई शुरू हो चुकी है। ‘पेटेंट’ से आशय उस राजनीतिक कॉपीराइट से है, जिसके सहारे बीजेपी देशभर में राम मंदिर के नाम पर वोट मांगती रही। लेकिन सवाल यह है कि राम मंदिर आंदोलन के असली सिपाही आज कहां हैं? जिनके कंधों पर चढ़कर सत्ता का सिंहासन मिला, वही चेहरे आज हाशिए पर क्यों हैं?
राम मंदिर आंदोलन जिसने बीजेपी को हिंदुत्व का ब्रांड दिया उसी आंदोलन से जुड़े दिग्गज आज गुमनामी के अंधेरे में धकेले जा चुके हैं। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती… नाम लंबे हैं, लेकिन हैरानी यह कि राम मंदिर बन गया, पर आंदोलनकारी बाहर हो गए। इसी कड़ी में बजरंगी नाम से पहचाने जाने वाले पूर्व राज्यसभा सदस्य विनय कटियार का उग्र तेवर अब पार्टी के भीतर बेचैनी पैदा कर रहा है।
बता दें कि गत माह विनय कटियार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को ‘स्वयंभू’ बता कर हमला बोला। इसके बाद इसी महीने अयोध्या लोकसभा और विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की बात कही। सवाल उठता है क्या यह व्यक्तिगत नाराज़गी है, या बीजेपी के भीतर अयोध्या की कमान छीनने की खुली चेतावनी?
25 मिनट की बंद कमरे की मुलाकात
इसी सियासी पृष्ठभूमि में दो दिन पहले एक और घटनाक्रम ने हलचल बढ़ा दी। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेई को पार्टी के जिला उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार पांडेय ‘खुन्नू’ और कमला शंकर पांडेय विनय कटियार के हिंदू धाम आवास तक ले गए। बताया जाता है कि कटियार और बाजपेई के बीच करीब 25 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई।
हालांकि इसे ‘शिष्टाचार भेंट’ कहा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सवाल गूंज रहा है क्या अयोध्या में किसी नए सियासी मोर्चे की पटकथा लिखी जा रही है?
बृजभूषण का वीडियो और दबा हुआ गुबार
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का वायरल वीडियो सिर्फ एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं, बल्कि बीजेपी के भीतर लंबे समय से दबे असंतोष का सार्वजनिक संकेत है। यह 2014 के बाद पहली बार है जब ऐसे नेता खुद को ‘बेगाना’ बता रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी स्वयं राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। अयोध्या के विकास में उनका योगदान भी कम नहीं रहा, लेकिन दिल्ली से उनके रिश्तों को लेकर समय-समय पर उठती खबरें इस ‘पेटेंट वॉर’ को और संदिग्ध बनाती हैं।
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अब सवाल यह है कि क्या बीजेपी में अब राम से ज्यादा राम पर अधिकार अहम हो गया है? क्या आंदोलनकारी केवल इस्तेमाल होकर किनारे कर दिए गए? संकेत साफ हैं राम मंदिर बन चुका है, लेकिन बीजेपी के भीतर ‘राम राजनीति’ की सबसे बड़ी लड़ाई अब शुरू हुई है और इस जंग का मैदान…अयोध्या है।



