SIR Row: SIR पर जस्टिस भुइयां की टिप्पणी से गरमाई सियासत, CEC के खिलाफ विपक्ष का अभियान तेज
SIR Row: मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए नोटिस और सुनवाई जरूरी बताने वाले बयान को विपक्ष ने बनाया मुद्दा, आज CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
SIR Row: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की हालिया टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने अभियान को और धार दी है। जस्टिस भुइयां ने कहा था कि किसी मतदाता का नाम चुनावी सूची से हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विपक्ष SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहा है। हालांकि, जस्टिस भुइयां की टिप्पणी को किसी लंबित मामले पर अदालत का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। यह टिप्पणी उन्होंने हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान की थी।
वोट के अधिकार को लेकर क्या बोले जस्टिस भुइयां?
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को दो अलग-अलग वर्गों में नहीं बांटता—एक वे जिनके पास मतदान का अधिकार है और दूसरे वे जिनके पास यह अधिकार नहीं है। उन्होंने बड़े पैमाने पर नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली किसी भी प्रक्रिया को मनमाना बताया और संविधान के अनुच्छेद 14 और 326 का उल्लेख किया।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी मतदाता का नाम एक बार मतदाता सूची में दर्ज हो जाने के बाद, मृत मतदाता के मामले को छोड़कर, बिना नोटिस और सुनवाई के हटाया नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक मताधिकार को नागरिकता से अलग नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस ने CEC पर साधा निशाना
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे चुनाव आयोग के खिलाफ पार्टी के रुख के समर्थन के तौर पर पेश किया। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए उनके संवैधानिक दायित्वों पर सवाल उठाए।
कांग्रेस का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा विपक्ष के इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं। SIR को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सत्यापित और अद्यतन करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है।
आज सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई
CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। याचिकाओं में CEC को लेकर विभिन्न मांगें उठाई गई हैं।
इस सुनवाई को SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मौजूदा विवाद के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली में प्रदर्शन और हिरासत का दौर
CEC के खिलाफ विपक्षी और विभिन्न नागरिक संगठनों के प्रदर्शन भी जारी हैं। दिल्ली में रविवार को अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने 120 से अधिक लोगों को थोड़े समय के लिए हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि कई प्रदर्शनों के लिए अनुमति नहीं ली गई थी, जबकि प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में बदलाव और SIR को लेकर अपनी आपत्तियों को लगातार सार्वजनिक मंचों पर उठा रहे हैं।
मुंबई में ठाकरे बंधुओं ने निकाला मार्च
महाराष्ट्र में भी SIR और CEC को लेकर विपक्ष का विरोध सामने आया। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की अगुवाई में मुंबई में विरोध मार्च निकाला गया। इसमें कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने भी हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में SIR को वापस लेने की मांग की। राज ठाकरे ने मतदाता सूची में बदलाव के साथ-साथ चुनाव में बैलेट पेपर की वापसी की मांग भी उठाई।
विपक्ष ने आगे के आंदोलन का भी बनाया कार्यक्रम
INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है। विपक्षी सांसदों ने 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। इसके अलावा आने वाले समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की योजना भी सामने आई है।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि SIR अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मताधिकार, संवैधानिक प्रक्रियाओं और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है।



