स्कूलों में 25% फ्री सीटों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अमीर-गरीब बच्चे पढ़ेंगे एक साथ
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: निजी स्कूलों में 25% फ्री सीटों पर अमीर-गरीब बच्चे एक साथ पढ़ेंगे, राज्यों को नियम बनाने का निर्देश।
नई दिल्ली: निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान में निहित भाईचारे (Fraternity) की भावना तभी साकार हो सकती है, जब समाज के हर वर्ग के बच्चे, चाहे वे गरीब हों या अमीर, एक ही कक्षा में, एक ही बेंच पर बैठकर शिक्षा प्राप्त करें।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) की धारा 12(1)(सी) को संविधान के अनुच्छेद 21ए और 39(एफ) से जोड़ते हुए कहा कि यह कोई वैकल्पिक या अलग से चलाई जाने वाली योजना नहीं है, बल्कि समान शिक्षा व्यवस्था को लागू करने का संवैधानिक माध्यम है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरटीई कानून का उद्देश्य 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को बिना किसी जातिगत, सामाजिक या आर्थिक भेदभाव के समान स्कूल प्रणाली में शिक्षा देना है। कोर्ट ने कहा कि जब बच्चे साथ पढ़ते, खेलते और सीखते हैं, तो समाज में मौजूद वर्ग और जाति की दीवारें स्वतः टूटती हैं।
अपने फैसले में अदालत ने कोठारी आयोग की कॉमन स्कूल सिस्टम की अवधारणा का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें यह आशंका जताई गई थी कि गरीब बच्चे निजी स्कूलों में अमीर बच्चों के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाएंगे। अदालत ने कहा कि वंचित वर्ग के बच्चों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि शिक्षा प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए।
राज्यों को नियम बनाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आरटीई अधिनियम की धारा 38 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे स्पष्ट नियम बनाएं, ताकि वंचित वर्ग के बच्चों को पड़ोस के निजी स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित हो सके। एनसीपीसीआर को आदेश दिया गया है कि वह सभी राज्यों से नियमों की स्थिति पर रिपोर्ट लेकर 31 मार्च तक हलफनामा दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।



