लोक निर्माण विभाग में अनुभव प्रमाण पत्र से करोड़ों का टेंडर हथियाने का खेल

  • 95 करोड़ की सड़क परियोजना पर घमासान, मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत
  • बहराइच टेंडर निरस्त, अधूरे काम को पूरा दिखाने का आरोप

लखनऊ। देवीपाटन मंडल में सड़क निर्माण के ठेकों को लेकर एक बार फिर बड़ा खेल उजागर हुआ है। बहराइच जिले में प्रस्तावित करीब 95 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना के टेंडर में अधूरे कार्य को पूर्ण दर्शाते हुए अनुभव प्रमाण पत्र लगाने का गंभीर आरोप सामने आया है। मामला सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा, जिसके बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू होते ही पूरी टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। हालांकि निरस्तीकरण का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन विभागीय गलियारों में इसे बड़ी कार्रवाई का संकेत माना जा रहा है।

शिकायतकर्ता गोंडा निवासी पवन कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि बहुचर्चित आलोक कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर राकेश कुमार पांडेय ने बहराइच के काकरदरी मार्ग चौड़ीकरण का ठेका हासिल करने के लिए गिलौला बाईपास निर्माण का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया।

बताया गया है कि 12 जनवरी 2026 को लखनऊ स्थित एनएच खंड के अधिशासी अभियंता कार्यालय से जारी प्रमाण पत्र में गिलौला बाईपास का कार्य पूर्ण दर्शाया गया, जबकि मौके पर अभी निर्माण कार्य जारी है। शिकायत के साथ अधूरे निर्माण की तस्वीरें भी मुख्यमंत्री को सौंपी गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कार्य अधूरा था तो अनुभव प्रमाण पत्र जारी कैसे हुआ? क्या यह मात्र लापरवाही है या फिर सुनियोजित मिलीभगत? जांच का दायरा अब प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों तक पहुंच सकता है।

पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्न

बहराइच टेंडर का निरस्त होना इस बात का संकेत है कि शासन स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया है। यदि आरोप सही पाए गए तो यह केवल एक ठेकेदार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि विभागीय तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। देवीपाटन मंडल में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता पहले से चर्चा में रही है। ऐसे में यह प्रकरण आने वाले दिनों में बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव का कारण बन सकता है।

बेटे के नाम कंपनी बनाकर बढ़ाई पात्रता

आरोप है कि तकनीकी पात्रता को मजबूत दिखाने के लिए प्रोपराइटर ने अपने बेटे के नाम से भी एक निर्माण कंपनी गठित की। इस तरह संयुक्त अनुभव दिखाकर निविदा में बढ़त लेने की कोशिश की गई।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

देवीपाटन मंडल में ठेकों को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। वर्ष 2025 में कथित सांठगांठ की शिकायत पर नौ सड़कों के टेंडर निरस्त किए गए थे। वर्ष 2022 में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर ठेका लेने के मामले में कार्रवाई हुई थी, जिसमें कुछ अधिकारियों पर भी गाज गिरी थी। इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित फर्म ने विभागीय ‘सेटिंग’ के जरिए लगभग 700 करोड़ रुपये के कार्य पूर्व में हासिल किए और वर्तमान में भी करीब 200 करोड़ रुपये के कार्य प्रक्रिया में हैं।

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