US Supreme Court Verdict: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ गैरकानूनी, कांग्रेस की मंजूरी जरूरी
US Supreme Court Verdict: US Supreme Court ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया। कोर्ट ने कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है। जानें फैसले का भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर।
US Supreme Court Verdict: Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में अदालत ने कहा कि टैरिफ लगाने की संवैधानिक शक्ति अमेरिकी कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
चीफ जस्टिस John Roberts की अगुवाई वाली पीठ ने माना कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान वाणिज्य को रेगुलेट करने की अनुमति देता है, लेकिन टैरिफ लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं देता।
क्या है पूरा मामला?
ट्रंप ने अप्रैल 2025 में “नेशनल इमरजेंसी” घोषित कर कई देशों पर “रेसिप्रोकल टैरिफ” लगाए थे। भारत, चीन, मेक्सिको समेत अनेक देशों पर 25% तक आयात शुल्क लगाया गया। भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ भी लगाया गया था। बाद में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद दर घटाकर 18% कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने की शक्ति कांग्रेस को दी गई है। फैसले में कहा गया कि राष्ट्रपति को अपने दावे के समर्थन में कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी दिखानी होगी, जो इस मामले में मौजूद नहीं थी।
असहमति और आगे का रास्ता
जस्टिस सैमुअल अलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने फैसले से असहमति जताई। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य कानूनों के तहत सीमित दायरे में टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
वैश्विक असर और भारत पर प्रभाव
इस फैसले का वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में हालिया तनाव के बीच यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब अमेरिकी सरकार को आयातकों को अरबों डॉलर का रिफंड करना पड़ सकता है।
यह फैसला ट्रंप के आक्रामक व्यापार एजेंडा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और आने वाले समय में अमेरिकी व्यापार नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।



