Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल पर अकाली दल का बड़ा दांव, बैठक में क्या तय हुआ? परिसीमन पर भी साफ किया रुख
शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण विधेयक को जल्द लागू करने और निष्पक्ष परिसीमन की मांग की है। पार्टी ने लोकसभा सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी के प्रस्ताव का समर्थन किया।

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण विधेयक और देश में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर शिरोमणि अकाली दल ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। चंडीगढ़ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें महिलाओं को राजनीति में समान प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ परिसीमन की प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। बैठक के बाद अकाली दल ने महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द लागू करने की मांग उठाई। पार्टी का कहना है कि देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अब किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
अकाली दल ने अपने इस रुख को सिख गुरुओं की शिक्षाओं से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी हमेशा महिलाओं की गरिमा, समानता और अधिकारों को महत्व देती रही है। पार्टी के मुताबिक सिख गुरुओं ने समाज में महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने की बात कही थी और इसी विचार से प्रेरणा लेते हुए महिलाओं को राजनीतिक संस्थाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
पार्टी की बैठक में महिला आरक्षण के साथ परिसीमन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अकाली दल का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को अनिश्चित समय तक आगे नहीं टाला जाना चाहिए। पार्टी चाहती है कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उनकी आबादी और भूमिका के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अवसर मिले। इसके लिए आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया को स्पष्ट समयसीमा के साथ आगे बढ़ाने की मांग की गई है।
अकाली दल ने अपने तर्क के समर्थन में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी SGPC का उदाहरण भी दिया। पार्टी के मुताबिक SGPC की व्यवस्था में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अकाली दल का कहना है कि जब धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो देश की लोकतांत्रिक राजनीति में भी महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने में देरी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में परिसीमन को लेकर अकाली दल ने संतुलित और निष्पक्ष प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। पार्टी का कहना है कि परिसीमन का उद्देश्य केवल लोकसभा या विधानसभा सीटों की सीमाओं को बदलना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका असर सभी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ता है। इसलिए इस पूरी प्रक्रिया में राज्यों के हितों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
अकाली दल ने कहा कि परिसीमन के दौरान किसी एक राज्य को राजनीतिक या प्रतिनिधित्व के लिहाज से अनुचित लाभ नहीं मिलना चाहिए और न ही किसी राज्य को नुकसान की स्थिति में धकेला जाना चाहिए। पार्टी के मुताबिक सभी राज्यों को समान और उचित प्रतिनिधित्व मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। पंजाब जैसे राज्यों के लिए परिसीमन का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सीटों के पुनर्गठन का सीधा असर भविष्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है।
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पार्टी ने केंद्र सरकार की ओर से सदनों की सीटों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव का भी समर्थन किया है। अकाली दल के मुताबिक यदि सभी राज्यों में मौजूदा सीटों की संख्या में समान रूप से 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जाती है, तो इससे परिसीमन के कारण पैदा होने वाली कई चिंताओं को दूर किया जा सकता है। पार्टी का मानना है कि लोकसभा में सीटों की कुल संख्या बढ़ने से राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है और नए परिसीमन के बाद सीटों के पुनर्वितरण को लेकर राजनीतिक असंतोष कम किया जा सकता है।
महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों मुद्दे इस समय राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बने हुए हैं। महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक निश्चित हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। वहीं परिसीमन के जरिए आबादी में हुए बदलाव के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों और सीटों के प्रतिनिधित्व को पुनर्गठित किया जाना है। दोनों प्रक्रियाओं के आपस में जुड़े होने के कारण इनके क्रियान्वयन का समय और तरीका राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
अकाली दल ने स्पष्ट किया है कि वह महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों और राज्यों के समान प्रतिनिधित्व, दोनों मुद्दों पर संतुलित नीति चाहता है। पार्टी के अनुसार महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के साथ परिसीमन की प्रक्रिया भी ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार किया जाए। पार्टी का तर्क है कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर विश्वास बनाए रखना भी है।
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अकाली दल का यह रुख पंजाब की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी लंबे समय से राज्य के हितों और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रही है। ऐसे में परिसीमन पर समान प्रतिनिधित्व की मांग के जरिए अकाली दल एक बार फिर राज्यों के अधिकार और राजनीतिक संतुलन के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस से जोड़ रहा है।
फिलहाल पार्टी ने महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने और परिसीमन की प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की मांग की है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और अन्य राजनीतिक दल अकाली दल के इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं। खास तौर पर सीटों में 50 फीसदी समान बढ़ोतरी के सुझाव पर होने वाली राजनीतिक चर्चा आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकती है।



