Kanwar Yatra: 15 साल की खुशी ने उठाई 61 किलो की कांवड़, मोदीनगर पहुंचते ही हुआ भव्य स्वागत
हरिद्वार से 61 लीटर गंगाजल लेकर मोदीनगर पहुंची खुशी चौधरी, किसान यूनियन ने उपहार में दी स्कूटी
Kanwar Yatra: सावन के पावन महीने में कांवड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर हजारों कांवड़िए अपने-अपने शहरों और गांवों की ओर लौट रहे हैं। इसी बीच गाजियाबाद के मोदीनगर की 15 वर्षीय खुशी चौधरी अपनी आस्था, हौसले और संकल्प को लेकर चर्चा में हैं। खुशी हरिद्वार से 61 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर मोदीनगर पहुंचीं। उनकी इस यात्रा का स्थानीय लोगों ने जोरदार स्वागत किया और रास्ते में फूल बरसाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
खुशी चौधरी गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र के अबूपुर गांव की रहने वाली हैं। बताया गया कि उन्होंने हरिद्वार से करीब 61 लीटर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा शुरू की थी। रविवार दोपहर जब वह मोदीनगर पहुंचीं तो दिल्ली-मेरठ मार्ग पर मोदी मंदिर के सामने बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए मौजूद थे। लोगों ने खुशी पर फूल बरसाए और उनकी यात्रा की सराहना की।
खुशी की कांवड़ यात्रा इसलिए भी खास रही क्योंकि इतनी कम उम्र में उन्होंने भारी मात्रा में गंगाजल लेकर लंबी दूरी की यात्रा पूरी की। 61 लीटर गंगाजल का वजन करीब 61 किलोग्राम होता है। इतनी मात्रा में गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पूरी करना शारीरिक मजबूती के साथ-साथ दृढ़ संकल्प और धैर्य की भी मांग करता है। खुशी के परिवार और स्थानीय लोगों ने उनकी इस उपलब्धि को श्रद्धा और साहस का उदाहरण बताया।
खुशी के मोदीनगर पहुंचने पर किसान यूनियन अराजनैतिक के पदाधिकारियों ने भी उनका सम्मान किया। संगठन की ओर से खुशी को उपहार के रूप में एक स्कूटी भेंट की गई। सम्मान समारोह के दौरान खुशी काफी उत्साहित नजर आईं। स्थानीय लोगों ने कहा कि उनकी उम्र भले ही कम है, लेकिन धार्मिक आस्था और संकल्प के मामले में उन्होंने बड़ी मिसाल पेश की है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगेराम त्यागी ने इस मौके पर खुशी की सराहना की। उन्होंने कहा कि खुशी ने 61 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर यह साबित किया है कि श्रद्धा और हौसले के सामने उम्र कोई मायने नहीं रखती। उनके मुताबिक, इतनी कम उम्र में कठिन यात्रा को पूरा करना उनके आत्मविश्वास और समर्पण को दिखाता है।
सावन के दौरान हर साल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व रहता है। मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, बागपत और आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। वहां से गंगाजल लेकर कांवड़िए पैदल अपने क्षेत्रों की ओर लौटते हैं। यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालु स्थानीय शिव मंदिरों में गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाती है और यातायात को नियंत्रित करने के लिए रूट डायवर्जन भी किया जाता है। इसके अलावा कांवड़ियों के लिए जगह-जगह शिविर लगाए जाते हैं, जहां उनके ठहरने, भोजन और आराम की व्यवस्था की जाती है।
गाजियाबाद और मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के प्रमुख कांवड़ मार्गों पर भी इस बार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। रास्ते में कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से कांवड़ियों के लिए सेवा शिविर लगाए गए हैं। कहीं भोजन और पेयजल की व्यवस्था की गई है तो कहीं चिकित्सा सहायता और आराम करने के लिए शिविर बनाए गए हैं।
खुशी चौधरी की कहानी इसी आस्था और संकल्प की एक मिसाल बनकर सामने आई है। 15 साल की उम्र में 61 लीटर गंगाजल लेकर हरिद्वार से मोदीनगर तक की यात्रा पूरी करने वाली खुशी के स्वागत के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। फूलों की बारिश के बीच उनका स्वागत किया गया और किसान संगठन की ओर से स्कूटी देकर सम्मानित किया गया।
अब खुशी की इस यात्रा की चर्चा आसपास के इलाकों में भी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी मेहनत और हौसला दूसरे श्रद्धालुओं के लिए भी प्रेरणा का कारण बन सकता है। सावन की कांवड़ यात्रा के बीच खुशी चौधरी की यह कहानी आस्था, संकल्प और सम्मान की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जिसने मोदीनगर में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।



