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न्याय व्यवस्था: सुप्रीम कोर्ट में 8 तो देश की हाई कोर्ट में जजों के 456 पद खाली

अन्य कारणों के अलावा देश के अलग अलग न्यायालयों में सालों से लंबित पड़े मामलों का एक बड़ा कारण न्यायालयों में जजों की कमी है. सरकार द्वारा संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक़ देश के सर्वोच्च न्यायालय में 1 मार्च 2021 तक 66,727 मामले लंबित थे. वहीं देश के सर्वोच्च न्यायलय में जजों की कुल स्वीकृत संख्या 34 है जिसमें से 8 पद अभी खाली हैं. सुप्रीम कोर्ट में फ़िलहाल 25 पुरूष और 1 महिला जज हैं. सभी आंकड़े 20 जुलाई तक के हैं. गौरतलब है कि ये आंकड़ा सरकार ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में दिया है.

देश के HC में जजों के स्वीकृत 1098 पदों में से 454 पद खाली
सरकार के जवाब के मुताबिक़ देश के अभी उच्च न्यायालयों को मिलाकर जजों की कुल स्वीकृत संख्या 1098 है,इनमें सबसे ज़्यादा स्वीकृत पद इलाहाबाद हाई कोर्ट में है जहां ये संख्या 160 है जबकि सबसे कम सिक्किम हाई कोर्ट में है जहां इसकी संख्या महज 3 है. गौरतलब है कि इन स्वीकृत 1098 पदों में से देश के उच्च न्यायालयों में जजों के 454 पद खाली पड़े हैं.

स्वीकृत पदों की तरह खाली पड़े पदों की संख्या भी सबसे ज़्यादा इलाहाबाद हाई कोर्ट में ही है यहां जजों के कुल 66 पद खाली पड़े हैं. इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट का नम्बर आता है जहां जजों के स्वीकृत 72 पदों में से 41 पद खाली पड़े हैं. फ़िलहाल देश के सभी उच्च न्यायालयों को मिलाकर जजों के 644 पद भरे हुए हैं जिनमें 567 पुरुष जबकि 77 महिला जज हैं.

देश के उच्च न्यायालयों में 57 लाख से ज्यादा मामले लंबित
वहीं बता दे कि देश के सभी 25 उच्च न्यायालयों में कुल मिलाकर 57 लाख से भी ज़्यादा मामले लंबित पड़े हैं जिनमें से 40 फ़ीसदी मामले 5 साल से 20 साल तक पुराने हैं. कुल लंबित मामलों में से 54 फ़ीसदी मामले केवल पांच उच्च न्यायालयों में लंबित हैं.इनमें इलाहाबाद , पंजाब और हरियाणा,मद्रास, बॉम्बे और राजस्थान हाईकोर्ट शामिल हैं.

इन राज्यों के HC में खाली पड़े हैं जजों के पद
जजों के खाली पड़े पदों की बात करें तो पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 39 (85 ) , मद्रास हाईकोर्ट में 17 ( 75 ) , बॉम्बे हाईकोर्ट में 31 ( 94 ) जबकि राजस्थान हाईकोर्ट में 27 (50) पद खाली पड़े हैं. कोष्ठक में दी गई संख्या कुल स्वीकृत पदों की संख्या है. वहीं राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों में भी पांच हज़ार से ज़्यादा पद खाली पड़े हैं.

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