Lucknow News- नागरिकता, पता या जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है ‘आधार’ : भुवनेश कुमार

Lucknow News-उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन देश-विदेश से आए लगभग 40 विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और डिजिटल साक्ष्य पर व्याख्यान दिए। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी और अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने अतिथि वक्ताओं का प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।

इस मौके पर भुवनेश कुमार (सीईओ UIDAI, भारत सरकार) ने आधार परियोजना के महत्व और भारत में गोपनीयता कानूनों के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम की व्याख्या करते हुए बताया कि यह अधिनियम अनधिकृत डेटा प्रसंस्करण पर कार्रवाई सुनिश्चित करता है और भारत को वैश्विक गोपनीयता मानकों के अनुरूप लाने में मदद करता है।

पुलिस उप महानिरीक्षक पवन कुमार ने साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती पर ध्यान दिलाया और कहा कि यह केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों का साझा प्रयास होना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत में अब तक 60 लाख से अधिक साइबर अपराध दर्ज हो चुके हैं।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश तलबंत सिंह ने डिजिटल साक्ष्य की कानूनी मान्यता और भा.साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63 के अंतर्गत आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी दी।

सत्र के दौरान साइबर विशेषज्ञों अमित कुमार, डॉ. अमित दुबे, अतुल कुमार ओझा, पवन शर्मा, डॉ. मनीष राय, कर्नल पंकज वर्मा और अभीर नायक ने साइबर अपराध रोकथाम, डिजिटल साक्षरता, क्रिप्टोकरेन्सी स्कैम, आंतरिक कौशल विकास और जोखिम-आधारित ऑडिट के महत्व पर चर्चा की।

संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने भीतर नेतृत्व क्षमता का विकास करना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि यह संस्थान अपनी गुणवत्ता और विशेषज्ञता के लिए विश्व स्तर पर पहचाना जाएगा।

इस अवसर पर संस्थान के प्रशासनिक और शैक्षणिक संकाय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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