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Varanasi News : उच्च शिक्षा की शिक्षण पद्धति पर मंथन, आईयूसीटीई में पाँच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

Varanasi News : आईयूसीटीई वाराणसी में ‘ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन’ विषय पर पाँच दिवसीय कार्यशाला शुरू। कुलपति सी.बी. शर्मा और प्रो. चंदकिरण सलूजा ने उच्च शिक्षा की प्रभावी शिक्षण पद्धति पर रखा दृष्टिकोण।

Varanasi News : अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में 16 फ़रवरी 2026 से “ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन: साइंसेज़, मैथमेटिक्स, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़ एंड मैनेजमेंट” विषय पर पाँच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य उच्च शिक्षा में शिक्षण पद्धतियों को अधिक प्रभावी, शोधपरक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है।

कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ. राजा पाठक द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती तथा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

कुलपति प्रो. सी. बी. शर्मा ने रखा उच्च शिक्षा पर दृष्टिकोण

मुख्य अतिथि के रूप में सी. बी. शर्मा, कुलपति, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की शिक्षण पद्धति पर शोध और सामग्री अपेक्षाकृत कम उपलब्ध है। उच्च शिक्षा को सत्य की खोज बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शिक्षण प्रणाली आत्मनिर्भरता और बहुआयामी पद्धतियों पर आधारित होनी चाहिए।

प्रभावी शिक्षण में ‘पंचकोश’ और आत्मचिंतन की भूमिका

मुख्य वक्ता चंदकिरण सलूजा, पूर्व प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रभावी शिक्षण पद्धति को विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया और आत्मचिंतन से जुड़ा बताया। उन्होंने ‘पंचकोश’ की अवधारणा स्पष्ट करते हुए कहा कि समग्र शिक्षा शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाती है।

उन्होंने ‘श्रवण, मनन और निदिध्यासन’ को ज्ञान आत्मसात करने की मूल प्रक्रिया बताते हुए कहा कि शिक्षण तभी सार्थक है जब विद्यार्थी सक्रिय सहभागिता से सीखें।

ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी की आवश्यकता पर जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने उच्च शिक्षा में ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक को विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया और आत्मचिंतन के आधार पर उपयुक्त शिक्षण पद्धति का चयन करना चाहिए।

डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने स्वागत वक्तव्य दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन राज सिंह, सहायक आचार्य ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुशाग्री सिंह ने किया।

विज्ञान शिक्षण की चुनौतियाँ और समाधान

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के शिक्षा संकाय से प्रो. सुनील कुमार सिंह ने “उच्च शिक्षा में विज्ञान शिक्षण की वर्तमान समस्याएँ एवं संभावित समाधान” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विज्ञान शिक्षण में उभरती चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए नवोन्मेषी और व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत किए।

समूह चर्चा में बनी शिक्षण रणनीति

अंतिम दो सत्रों में प्रतिभागियों ने विषय-आधारित समूहों में शिक्षण रणनीतियों का निर्माण किया। अनुशासन-विशिष्ट आवश्यकताओं का मानचित्रण करते हुए व्यावहारिक और क्रियान्वित करने योग्य सुझाव तैयार किए गए।

इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. उदय प्रताप सिंह सहित अनेक शिक्षाविद्, शोध छात्र और केंद्र के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन आईयूसीटीई के सभी संकाय सदस्यों द्वारा किया जा रहा है।

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