Educational Update: CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में बड़ा बदलाव, 9वीं से तीन भाषाएं अनिवार्य, तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं

2026-27 सत्र से लागू होगा नया नियम, दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी, तीसरी भाषा के अंक मार्कशीट में जुड़ेंगे

Educational Update: Central Board of Secondary Education ने 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव लागू करने का फैसला किया है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य होगी। हालांकि राहत की बात यह है कि तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं लिया जाएगा।

सीबीएसई द्वारा जारी नए सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी होगा। यह बदलाव National Council of Educational Research and Training के नए पाठ्यक्रम के तहत लागू किया जाएगा।

क्या है CBSE का नया R फॉर्मूला?

सीबीएसई ने भाषा शिक्षा को तीन हिस्सों में बांटा है—

  • R1 (प्राथमिक भाषा)
  • R2 (दूसरी भाषा)
  • R3 (तीसरी भाषा)

नियम के अनुसार, इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। छात्र चाहें तो तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा चुन सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले दो भारतीय भाषाएं चुनना जरूरी होगा। विदेशी भाषा को चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में भी पढ़ा जा सकता है।

तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का पेपर शामिल नहीं किया जाएगा। इसका असेसमेंट केवल स्कूल स्तर पर होगा। हालांकि स्कूल द्वारा दिए गए इंटरनल मार्क्स या ग्रेड अंतिम मार्कशीट में जोड़े जाएंगे।

बोर्ड का कहना है कि यह फैसला छात्रों पर अनावश्यक परीक्षा दबाव कम करने के लिए लिया गया है।

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फिर भी तीसरी भाषा को हल्के में न लें

भले ही तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, लेकिन उसके अंक या ग्रेड छात्रों की फाइनल मार्कशीट में दिखाई देंगे। इसलिए छात्रों को इस विषय की पढ़ाई को गंभीरता से लेना होगा।

सीबीएसई ने यह भी साफ किया है कि किसी भी छात्र को केवल तीसरी भाषा के आधार पर बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।

छात्रों और अभिभावकों पर क्या असर पड़ेगा?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे छात्रों को अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं के प्रति बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

हालांकि कुछ अभिभावकों का मानना है कि अतिरिक्त भाषा पढ़ने से छात्रों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ सकता है। वहीं बोर्ड का कहना है कि परीक्षा का दबाव कम रखने के लिए तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं रखा गया है।

Written By: Anushri Yadav

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