National News: SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: ‘मतदाता सूची पुनरीक्षण चुनाव आयोग का अधिकार’, विपक्ष को बड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट ने SIR को संवैधानिक बताते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। अदालत ने साफ किया कि आयोग नागरिकता से जुड़े सवालों की जांच कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला सक्षम प्राधिकारी ही करेगा।

National News: Supreme Court of India ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि SIR कराना Election Commission of India के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और त्रुटिरहित होना बेहद जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराने की वैधानिक शक्ति प्राप्त है। अदालत ने साफ किया कि आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया और न ही नियमों के खिलाफ जाकर मतदाताओं के नाम हटाए गए।

कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए नागरिकता से जुड़े सवालों की जांच कर सकता है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं कर सकता, लेकिन मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने के संदर्भ में जरूरी जांच करना उसके अधिकार क्षेत्र में आता है।

पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेजों या पात्रता पर संदेह हो तो चुनाव आयोग उसे सक्षम प्राधिकारी के पास भेज सकता है। अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकारी ही करेगा।

विपक्ष की दलीलें क्यों खारिज हुईं?

SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं में दावा किया गया था कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जिन लोगों का नाम 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उनसे पुराने मतदाताओं से पारिवारिक संबंध साबित करने की शर्त गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है।

याचिकाएं दायर करने वालों में Yogendra Yadav, Mahua Moitra, Manoj Jha और Supriya Sule जैसे नाम शामिल थे।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया संविधान के अनुरूप है और चुनाव आयोग ने कानून के दायरे में रहकर काम किया है।

बिहार से शुरू हुआ था SIR अभियान

चुनाव आयोग ने पिछले साल बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू किया था। बाद में इसे पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया। आयोग का कहना था कि फर्जी और अयोग्य मतदाताओं को हटाने तथा मतदाता सूची को अपडेट रखने के लिए यह अभियान जरूरी है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कुछ अंतरिम निर्देश भी दिए थे। अदालत के निर्देश पर आधार कार्ड को भी सत्यापन प्रक्रिया में शामिल किया गया था।

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फैसले के राजनीतिक मायने

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। वहीं विपक्ष को इस मामले में बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इस फैसले का असर आने वाले चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।

Written By : Ekta Verma

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