Lifestyle Update: भारत में तेजी से बढ़ रहे C-Section डिलीवरी के मामले, इस राज्य में 90% प्रसव ऑपरेशन से, जानिए वजह
Cesarean Delivery in India: क्यों बढ़ रही हैं सिजेरियन डिलीवरी? रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
Lifestyle Update: भारत में सिजेरियन डिलीवरी (C-Section) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार देश के कई राज्यों में निजी अस्पतालों में होने वाली अधिकांश डिलीवरी ऑपरेशन के जरिए हो रही हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा जम्मू-कश्मीर से सामने आया है, जहां निजी अस्पतालों में करीब 90 प्रतिशत प्रसव सिजेरियन के माध्यम से किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे केवल चिकित्सकीय कारण ही नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा C-Section डिलीवरी
रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के मामले में देश में सबसे ऊपर है। यहां लगभग 90 प्रतिशत प्रसव ऑपरेशन के जरिए हो रहे हैं।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 87.7 प्रतिशत और तेलंगाना में 84 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं असम में 81.4 प्रतिशत और ओडिशा में 76.8 प्रतिशत डिलीवरी सिजेरियन पद्धति से की गईं।
इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़े आंकड़े
देश में सिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है।
- 2005-06 में केवल 8.5% जन्म C-Section से हुए थे।
- 2015-16 में यह बढ़कर 17.2% हो गया।
- 2019-21 में यह आंकड़ा 21.5% तक पहुंच गया।
- हालिया रिपोर्ट के अनुसार अब देश में 27.2% से अधिक प्रसव सिजेरियन डिलीवरी के जरिए हो रहे हैं।
हालांकि सरकारी अस्पतालों में यह वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी गति से देखी गई है।
C-Section डिलीवरी बढ़ने के 3 संभावित कारण
1. नॉर्मल डिलीवरी के दर्द का डर
कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान अपने परिवार या परिचितों से नॉर्मल डिलीवरी के दौरान होने वाले दर्द की कहानियां सुनती हैं। इससे उनके मन में पहले से ही डर बैठ जाता है। कई बार मेडिकल स्थिति सामान्य होने के बावजूद दर्द के डर के कारण सिजेरियन डिलीवरी को प्राथमिकता दी जाती है।
2. बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंता
गर्भवती महिला और परिवार के सदस्य अक्सर बच्चे की सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील रहते हैं। उन्हें लगता है कि ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी कराने से संभावित जटिलताओं का खतरा कम हो सकता है। इसी सोच के कारण कई परिवार डॉक्टरों से सिजेरियन डिलीवरी की मांग करते हैं।
3. तारीख और समय पहले से तय करने की सुविधा
सिजेरियन डिलीवरी में प्रसव की तारीख और समय पहले से निर्धारित किया जा सकता है। कई परिवारों को यह सुविधा पसंद आती है क्योंकि इससे वे अपनी तैयारियां और अन्य व्यवस्थाएं पहले से कर लेते हैं। यही वजह है कि कुछ लोग सुविधा के आधार पर भी C-Section को प्राथमिकता देने लगते हैं।
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क्या हर बार सिजेरियन जरूरी होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रिया है, लेकिन इसका फैसला केवल सुविधा या डर के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
यदि मां या बच्चे के स्वास्थ्य को कोई जोखिम है, तो C-Section जीवन रक्षक साबित हो सकता है। लेकिन जब मेडिकल रूप से नॉर्मल डिलीवरी संभव हो, तब केवल दर्द के डर या समय तय करने की सुविधा के कारण ऑपरेशन चुनना उचित नहीं माना जाता।
डॉक्टर की सलाह सबसे महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार, डिलीवरी का तरीका हमेशा मां और बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए तय किया जाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को इंटरनेट, अफवाहों या व्यक्तिगत अनुभवों के बजाय योग्य डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करना चाहिए।
भारत में बढ़ती सिजेरियन डिलीवरी की दर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बनती जा रही है। जहां जरूरत पड़ने पर C-Section एक सुरक्षित विकल्प है, वहीं अनावश्यक ऑपरेशन से बचना भी उतना ही जरूरी है। सही जागरूकता, डॉक्टर की सलाह और वैज्ञानिक सोच ही मां और बच्चे दोनों के लिए बेहतर निर्णय सुनिश्चित कर सकती है।



