Sheikh Hasina India News: शेख हसीना के कार्यक्रम से भारत ने बनाई दूरी, रिश्तों को लेकर सरकार ने अपनाया सतर्क रुख

विदेश मंत्रालय ने बताया निजी कार्यक्रम, बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश

Sheikh Hasina India News: भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के एक मीडिया कार्यक्रम से औपचारिक दूरी बनाकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह पड़ोसी देश की आंतरिक राजनीति में किसी भी तरह की भागीदारी नहीं चाहता। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था द्वारा आयोजित किया जा रहा है और भारत सरकार का इससे कोई संबंध नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में व्यक्त किए जाने वाले विचारों का समर्थन या अनुमोदन भारत सरकार की ओर से नहीं माना जाना चाहिए।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद दोनों देशों के संबंधों में नई चुनौतियां सामने आई हैं। दूसरी ओर भारत मौजूदा बांग्लादेश सरकार के साथ संवाद बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार इस कार्यक्रम से किसी भी रूप में जुड़ी नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब शेख हसीना के संभावित संबोधन पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि यदि वह अपने संबोधन में बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करती हैं, तो इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है।

शेख हसीना पहले ही दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता चुकी हैं। हालांकि उनके खिलाफ बांग्लादेश में कानूनी कार्रवाई और सजा से जुड़े मामलों के बीच उनकी संभावित वापसी राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। ऐसे में भारत नहीं चाहता कि उसकी धरती से होने वाला कोई कार्यक्रम बांग्लादेश की घरेलू राजनीति से जोड़ा जाए।

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कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की प्राथमिकता इस समय बांग्लादेश के साथ स्थिर और सकारात्मक संबंध बनाए रखना है। इसी रणनीति के तहत भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। यह निमंत्रण बिम्सटेक के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में दिया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश भी साफ दिखाई देती है।

भारत इस बात से भी अवगत है कि यदि शेख हसीना के कार्यक्रम को सरकारी समर्थन के रूप में देखा गया तो बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में इसका असर पड़ सकता है। इससे भारत विरोधी राजनीतिक माहौल बनने की आशंका भी बढ़ सकती है, जिसका असर द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग पर पड़ सकता है।

इसी वजह से भारत ने स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाते हुए यह संदेश दिया है कि वह शेख हसीना को मानवीय आधार पर शरण देने और किसी दूसरे देश की राजनीति में हस्तक्षेप करने के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना चाहता है। विदेश नीति के स्तर पर यह कदम भारत की उस दीर्घकालिक नीति के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में सार्वजनिक रूप से दखल देने से परहेज किया जाता है।

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