सदन में छलका विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का दर्द, बोले- अब तय करूंगा इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं
सदन में लगातार हंगामे से आहत दिखे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, बोले- लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने की पूरी कोशिश की, अब आत्ममंथन का समय आ गया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने सत्ता और विपक्ष दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना लगातार हो रहे हंगामे पर अपनी पीड़ा छिपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन का यह अंतिम चरण है और अब उन्हें गंभीरता से आत्ममंथन करना होगा कि क्या वे विधानसभा अध्यक्ष की इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के योग्य हैं।
हंगामे के बीच भावुक हुए विधानसभा अध्यक्ष
सदन को संबोधित करते हुए सतीश महाना ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से उन्होंने विधानसभा की गरिमा, लोकतांत्रिक परंपराओं और स्वस्थ संवाद को बनाए रखने का हरसंभव प्रयास किया। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने उन्हें गहरे स्तर पर आहत किया है।
उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि या तो उनके प्रयासों में कहीं कमी रह गई या फिर डॉ. भीमराव आंबेडकर की वह बात सही साबित होती है कि संविधान में नहीं, बल्कि उसे लागू करने वाले लोगों में कमी होती है।
बार-बार स्थगित करनी पड़ी सदन की कार्यवाही
बुधवार को प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा मामले और शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों पर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। शोर-शराबे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को पहले आधे घंटे और बाद में दोपहर एक बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष का कहना था कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
केशव प्रसाद मौर्य का विपक्ष पर हमला
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पूरा वक्तव्य नहीं देने दिया।
मौर्य ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल सदन की कार्यवाही बाधित करना है, जबकि जनता विकास और जनहित के मुद्दों पर चर्चा चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी को अपने राजनीतिक व्यवहार की कीमत आगामी विधानसभा चुनाव में चुकानी पड़ेगी।
क्या है पूरा विवाद?
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण के दौरान विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर जोरदार विरोध किया था। हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव को सदन से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने विधानसभा परिसर में धरना दिया और सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया।
बुधवार को भी यही मुद्दे सदन में गूंजते रहे, जिससे कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
राजनीतिक संकेत भी दे गए सतीश महाना?
सतीश महाना का यह बयान केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके शब्दों में व्यवस्था को लेकर चिंता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के क्षरण की पीड़ा साफ दिखाई दी। उनका यह कहना कि वह तय करेंगे कि इस पद के योग्य हैं या नहीं, राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे सकता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। एक ओर विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित करने का आरोप लगा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की भावुक टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को नया आयाम दे दिया है।



