Russia-Ukraine War: कीव पर रूस का बड़ा हवाई हमला, 14 लोगों की मौत, कई इलाकों में लगी भीषण आग
कीव में रातभर मिसाइल और ड्रोन हमलों से भारी तबाही, कई इमारतें और गोदाम क्षतिग्रस्त; यूक्रेन ने सहयोगी देशों से एयर डिफेंस सिस्टम की मांग दोहराई।
Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। बुधवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस की ओर से किए गए बड़े पैमाने के हवाई हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 27 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमलों के बाद शहर के कई हिस्सों में आग लग गई और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
कीव में कई इमारतें और गोदाम हुए क्षतिग्रस्त
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, रूसी मिसाइलों और ड्रोन हमलों की चपेट में कई रिहायशी इमारतें और औद्योगिक परिसर आए। शहर के मध्य क्षेत्र के पास स्थित एक बड़ा वेयरहाउस पूरी तरह तबाह हो गया, जबकि कई अन्य गोदामों में भीषण आग लग गई।
दमकल और राहत दलों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है।
अमोनिया लीक का भी बना खतरा
हमलों के बाद एक औद्योगिक क्षेत्र में अमोनिया गैस रिसाव की आशंका भी पैदा हो गई थी। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं ने समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया और बड़े हादसे को टाल दिया।
यूक्रेन ने फिर मांगी एयर डिफेंस सहायता
लगातार बढ़ते रूसी हमलों के बीच यूक्रेन ने एक बार फिर अपने पश्चिमी सहयोगी देशों से आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति तेज करने की अपील की है। यूक्रेन का कहना है कि मजबूत हवाई सुरक्षा ही नागरिक इलाकों को ऐसे हमलों से बचा सकती है।
एक दिन पहले रूस पर भी हुआ था हमला
इससे पहले 4 अगस्त को रूस के ब्लैक सी तट पर स्थित गेलेंदझिक के पास एक बीच पर ड्रोन हमला हुआ था। रूसी अधिकारियों के अनुसार इस हमले में तीन बच्चों समेत सात लोगों की मौत हुई थी और लगभग 40 लोग घायल हुए थे। रूस ने इस हमले के लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया था।
बढ़ती हिंसा से अंतरराष्ट्रीय चिंता
फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब भी जारी है और दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बढ़ते नागरिक हताहतों पर चिंता जताई है और दोनों देशों से तनाव कम करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयासों में तेजी नहीं आई, तो आने वाले दिनों में संघर्ष और गंभीर रूप ले सकता है।



