International News: 9/11 से पहले ओसामा बिन लादेन की नजर में था भारत, CIA दस्तावेजों से बड़ा खुलासा
CIA की सार्वजनिक की गई खुफिया फाइलों में भारत समेत कई देशों को ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा के संभावित लक्ष्यों में शामिल किए जाने का जिक्र सामने आया है।
International News: अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की ओर से सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों ने ओसामा बिन लादेन और उसके आतंकी संगठन अल-कायदा की पुरानी साजिशों को लेकर कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, 11 सितंबर 2001 के हमलों से कई साल पहले ही भारत भी बिन लादेन की संभावित आतंकी गतिविधियों के निशाने पर था। खुफिया आकलनों में भारत के अलावा कई अन्य देशों को भी अल-कायदा के संभावित लक्ष्यों में शामिल बताया गया था।
70 से ज्यादा खुफिया दस्तावेज किए गए सार्वजनिक
9/11 हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर CIA ने 70 से अधिक ‘प्रेसिडेंशियल इंटेलिजेंस ब्रीफ’ सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों में 1990 के दशक के आखिर से लेकर 2001 तक ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा से जुड़े खतरों का आकलन किया गया था। इन रिपोर्टों से यह समझने में मदद मिलती है कि अमेरिका की खुफिया एजेंसियां उस समय अल-कायदा को किस स्तर का वैश्विक खतरा मान रही थीं।
इन दस्तावेजों में 28 अगस्त 1998 की एक रिपोर्ट विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताई जा रही है। इसका शीर्षक था ‘बिन लादेन आतंकी नेटवर्क अभी भी एक खतरा’। रिपोर्ट में बिन लादेन के नेटवर्क और उसकी संभावित अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का आकलन किया गया था।
भारत समेत कई देशों को निशाना बनाने की आशंका
सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, बिन लादेन की संभावित आतंकी योजनाओं में भारत का भी जिक्र था। रिपोर्ट में भारत के साथ पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और नाइजीरिया जैसे देशों का भी उल्लेख किया गया था।
हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि भारत में किसी खास स्थान को निशाना बनाने की अंतिम योजना तैयार की गई थी या किसी हमले की निश्चित तारीख तय हुई थी। दस्तावेजों के कुछ हिस्से अब भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए भारत को लेकर बिन लादेन की योजना की पूरी तस्वीर सामने आना अभी बाकी है।
9/11 से पहले ही वैश्विक नेटवर्क मजबूत कर रहा था अल-कायदा
CIA के आकलनों में यह भी संकेत मिलता है कि अल-कायदा का नेटवर्क सिर्फ अफगानिस्तान तक सीमित नहीं था। संगठन ने अलग-अलग देशों में अपने संपर्क, समर्थक और संभावित स्लीपर नेटवर्क विकसित कर लिए थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आशंका थी कि बिन लादेन इन नेटवर्क का इस्तेमाल पश्चिमी देशों के साथ-साथ अन्य देशों में भी आतंकी हमलों के लिए कर सकता है।
अफगानिस्तान में अल-कायदा के ठिकानों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई के बावजूद संगठन की गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं। खुफिया रिपोर्टों में संचार नेटवर्क के सक्रिय रहने और कुछ प्रशिक्षण गतिविधियों के दोबारा शुरू होने की जानकारी भी सामने आई थी।
क्लिंटन से बुश प्रशासन तक दी गई चेतावनी
इन दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां 1998 से 2001 के बीच अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन के बढ़ते खतरे को लेकर अमेरिकी प्रशासन को लगातार जानकारी दे रही थीं। तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल से लेकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन के शुरुआती दौर तक बिन लादेन को एक गंभीर वैश्विक आतंकी खतरे के रूप में देखा जा रहा था।
खुफिया एजेंसियों के आकलन में यह स्पष्ट था कि बिन लादेन की महत्वाकांक्षाएं अफगानिस्तान तक सीमित नहीं थीं। उसका नेटवर्क अलग-अलग क्षेत्रों में फैल चुका था और आने वाले समय में बड़े हमलों की आशंका बनी हुई थी।



