West Bengal Politics: ‘जोड़ा फूल’ पर ममता-ऋतब्रत आमने-सामने, चुनाव आयोग में फिर सुनवाई
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों की दावेदारी पर चुनाव आयोग में सुनवाई हुई, अब फैसले का इंतजार है।
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रही खींचतान अब चुनाव आयोग के सामने पहुंच चुकी है। पार्टी के दो गुट खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए संगठन, नाम और पारंपरिक ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश कर रहे हैं। एक तरफ ममता बनर्जी का गुट है तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट।
गुरुवार को चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग समय पर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल की सुनवाई दोपहर 3 बजे और ममता बनर्जी गुट की सुनवाई शाम 4 बजे निर्धारित की गई थी। इससे पहले 12 सितंबर को भी दोनों पक्ष आयोग के सामने अपनी दलीलें और दस्तावेज पेश कर चुके हैं।
आखिर विवाद किस बात पर है?
मामला केवल चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं है। दोनों गुट तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी के आधिकारिक नाम पर भी दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग के सामने यह तय करने का सवाल है कि दोनों में से किस पक्ष को पार्टी की मौजूदा पहचान और आरक्षित चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने का अधिकार दिया जाए।
12 सितंबर की सुनवाई के दौरान आयोग ने ऋतब्रत गुट से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद दोनों पक्षों को अपनी दलीलों के समर्थन में अंतिम दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया गया। आयोग की मौजूदा प्रक्रिया से संकेत मिलता है कि मामला अब अहम चरण में पहुंच चुका है।
ऋतब्रत गुट की ओर से कौन पहुंचा?
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा। इसमें ऋतब्रत के अलावा अरूप राय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमान और पार्टी की ओर से कानूनी पक्ष रखने वाले प्रतिनिधि शामिल रहे।
ऋतब्रत गुट का दावा है कि उसके पास पार्टी संगठन और निर्वाचित विधायकों से जुड़े दस्तावेज हैं और इसी आधार पर वह चुनाव आयोग के सामने अपनी दावेदारी रख रहा है। 12 सितंबर की सुनवाई के बाद ऋतब्रत ने कहा था कि आयोग के सवालों का जवाब दिया गया और अतिरिक्त दस्तावेज भी जमा किए गए।
ममता गुट ने भी रखी अपनी दलील
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की तरफ से वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी समेत पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सामने पक्ष रखा। इससे पहले हुई सुनवाई में ममता गुट ने किसी अंतरिम व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि अंतिम फैसला आने तक पार्टी का मौजूदा चुनाव चिह्न उसके पास ही रहना चाहिए।
ममता गुट ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह आगामी उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा चुनाव चिह्न पर ही मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।
उपचुनाव के कारण बढ़ी अहमियत
नाम और चुनाव चिह्न को लेकर यह विवाद ऐसे समय चल रहा है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है।
दोनों गुट इन सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार चुके हैं। यही वजह है कि चुनाव आयोग के फैसले को लेकर दोनों पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर निकल चुकी है, लेकिन चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति अभी भी चर्चा में है।
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क्या हो सकता है आगे?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव आयोग इस विवाद में क्या आदेश देता है। आयोग के सामने दोनों पक्षों के संगठनात्मक दावों, दस्तावेजों और अन्य प्रस्तुतियों की जांच का मामला है।
मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग संभावित विकल्पों की चर्चा है, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ‘जोड़ा फूल’ किसी एक गुट को मिल गया है। आयोग के आदेश के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
अगर किसी पक्ष के खिलाफ फैसला आता है तो उसके पास आगे कानूनी विकल्प तलाशने का रास्ता भी खुला रह सकता है। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि चुनाव आयोग तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर क्या फैसला सुनाता है।



