Technology News: टेलीकॉम से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी कंपनी बन रहा जियो, भारत से दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी

5G, AI, क्लाउड और 6G पर जियो का बढ़ता फोकस, 6,817 पेटेंट दाखिल और 1,009 को वैश्विक मंजूरी; 52.4 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के नेटवर्क के साथ ग्लोबल टेक्नोलॉजी बाजार पर नजर

Technology News: भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने के बाद जियो अब खुद को सिर्फ कनेक्टिविटी कंपनी तक सीमित नहीं रखना चाहता। कंपनी अपने अगले चरण में टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रही है। इसका फोकस स्वदेशी तकनीक, बौद्धिक संपदा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म और क्लाउड पर है। जियो का लक्ष्य भारत में विकसित तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने के बाद वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना है। रिलायंस की वित्त वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक जियो के 52.4 करोड़ से ज्यादा ग्राहक थे।

जियो की शुरुआती कहानी ग्राहक संख्या, डेटा इस्तेमाल, नेटवर्क विस्तार और सस्ते मोबाइल इंटरनेट के इर्द-गिर्द रही। अब कंपनी नेटवर्क चलाने के लिए सिर्फ दूसरी कंपनियों की तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपना नेटवर्क सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंजीनियरिंग क्षमता विकसित कर रही है। यानी जियो के लिए तकनीक अब सिर्फ नेटवर्क का हिस्सा नहीं, बल्कि खुद एक उत्पाद बनती जा रही है।

जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कंपनी की 10वीं वर्षगांठ पर कहा कि जियो अब सिर्फ टेलीकॉम कंपनी नहीं है। कंपनी भारत में कनेक्टिविटी, डिजिटल उत्पाद, एंटरप्राइज सॉल्यूशन और AI से जुड़ी तकनीक विकसित कर रही है। उनका कहना है कि लक्ष्य तकनीक को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के साथ इसे वैश्विक बाजारों में ले जाना और भारत को तकनीक बनाने वाले देश के तौर पर मजबूत करना है।

जियो ने खुद का 5G टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार किया

जियो ने अपना 5G Core और OSS/BSS सिस्टम विकसित किया है। इसके बाद कंपनी ने Core, Radio और Operations Software को मिलाकर एंड-टू-एंड 5G टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार किया। यह स्टैक Standalone 5G पर आधारित है और बड़े स्तर पर इसकी टेस्टिंग की गई है। अक्टूबर 2022 से दिसंबर 2023 के बीच कंपनी ने पूरे देश में 5G कवरेज हासिल कर ली। मार्च 2026 तक जियो के 5G यूजर्स की संख्या 26.8 करोड़ से ज्यादा हो गई थी और उसके नेटवर्क पर कुल वायरलेस ट्रैफिक में 5G की हिस्सेदारी करीब 55 फीसदी थी।

रिलायंस की वित्त वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो का कुल ग्राहक आधार 52.4 करोड़ से ज्यादा था। करोड़ों ग्राहकों वाले लाइव नेटवर्क पर तकनीक का इस्तेमाल और परीक्षण कंपनी के लिए एक बड़ा तकनीकी फायदा माना जा रहा है।

6,817 पेटेंट दाखिल, इंजीनियरिंग टीम में 11 हजार से ज्यादा लोग

जियो के टेक्नोलॉजी बदलाव का एक बड़ा संकेत उसके पेटेंट भी हैं। 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी सहायक कंपनियों ने कुल 6,817 पेटेंट दाखिल किए थे। इनमें 4G, 5G, 6G, AI और क्लाउड से जुड़ी तकनीक शामिल है। इनमें से 1,009 पेटेंट को दुनियाभर में मंजूरी मिल चुकी है।

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) की Patent Cooperation Treaty (PCT) रैंकिंग में 2025 के प्रकाशित PCT आवेदनों के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स 2026 में दुनिया की शीर्ष 20 कंपनियों में शामिल हुआ और 20वें स्थान पर रहा। यह उपलब्धि जियो को वैश्विक स्तर पर पेटेंट दाखिल करने वाली प्रमुख तकनीकी कंपनियों की सूची में ले जाती है।

कंपनी की डिजिटल प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट टीम में 11,303 फुल-टाइम कर्मचारी हैं, जो उसके कुल कार्यबल का करीब 40 फीसदी हैं। कंपनी के मुताबिक, उसका फोकस 6G रिसर्च, AI आधारित नेटवर्क ऑटोमेशन, क्लाउड-नेटिव प्लेटफॉर्म और नए डिजिटल उत्पादों पर भी है।

भारत की जरूरतों से निकली तकनीक

जियो का फोकस ऐसी तकनीक बनाने पर भी है जो भारत जैसी बड़ी और विविध परिस्थितियों वाले देश में काम कर सके। होम ब्रॉडबैंड के लिए कंपनी ने Unlicensed Band Radio (UBR) तकनीक विकसित की है। इससे उन जगहों पर फाइबर जैसी ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी दी जा सकती है, जहां पारंपरिक फाइबर बिछाना मुश्किल या महंगा है।

मार्च 2026 तक जियो के 2.7 करोड़ से ज्यादा फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन थे और कंपनी ने देशभर में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड की उपलब्धता का विस्तार किया है। कंपनी ने मैक्रो बेस स्टेशन, आउटडोर और इनडोर छोटे सेल, मिलीमीटर-वेव और 5G-Wi-Fi जैसी तकनीक के साथ 1 Tbps User-Plane Function और छोटे आकार का निजी 5G नेटवर्क समाधान ‘5G-in-a-box’ भी विकसित किया है।

इन तकनीकों को भारत की बड़ी आबादी, अलग-अलग क्षेत्रों में आबादी के असमान वितरण और कम लागत की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। कंपनी के मुताबिक, ऐसी तकनीकें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के दूसरे बाजारों में भी उपयोगी हो सकती हैं।

भारत से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की तैयारी

जियो अब अपने मोबाइल कनेक्टिविटी, होम ब्रॉडबैंड और ऑटोनॉमस कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी स्टैक को वैश्विक स्तर पर पेश करने की दिशा में बढ़ रहा है। कंपनी की तकनीक का इस्तेमाल पहले से ही 52.4 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों वाले नेटवर्क पर हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में जियो नेटवर्क पर करीब 241 एक्साबाइट डेटा ट्रैफिक रहा।

इससे कंपनी दूसरे टेलीकॉम ऑपरेटरों और कारोबारियों को ऐसी तकनीक पेश कर सकती है, जिसे बड़े स्तर पर वास्तविक नेटवर्क में पहले ही परखा जा चुका है। यानी जियो के लिए तकनीक को सिर्फ अपने नेटवर्क में इस्तेमाल करने के बजाय उसे दूसरे ऑपरेटरों और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए बेचने या लाइसेंस देने की संभावना भी बन रही है।

रिलायंस ने जियो को भारत और दुनिया के ग्राहकों के लिए स्वदेशी तकनीक और डिजिटल सेवाएं विकसित करने वाले टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया है। कंपनी की रणनीति में वैश्विक बाजारों में अपनी तकनीक और डिजिटल क्षमताओं को ले जाने पर भी जोर है।

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AI, क्लाउड और 6G पर बढ़ रहा फोकस

जियो की तकनीक का दायरा अब कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर क्लाउड, एज कंप्यूटिंग, प्राइवेट 5G और AI तक पहुंच रहा है। कंपनी स्टैंडअलोन 5G नेटवर्क स्लाइसिंग, निजी 5G नेटवर्क, एज कंप्यूटिंग, क्लाउड प्लेटफॉर्म और ऑटोनॉमस नेटवर्क मैनेजमेंट जैसी तकनीकों के जरिए एंटरप्राइज क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी कर रही है।

रिलायंस ने ‘AI Everywhere, For Everyone’ के तहत कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म को जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में भी स्वदेशी तकनीक और डिजिटल सेवाओं को जियो की रणनीति का अहम हिस्सा बताया गया है। AI को नेटवर्क, ऑपरेशंस और ग्राहक प्लेटफॉर्म में तेजी से शामिल किया जा रहा है। कंपनी का फोकस भारत के बड़े पैमाने और लागत की जरूरतों के हिसाब से AI तकनीक विकसित करने और इसे समान जरूरत वाले दूसरे बाजारों तक पहुंचाने पर है।

कंपनी 6G तकनीक और भविष्य के वैश्विक मानकों को तैयार करने की प्रक्रिया में भी भाग ले रही है। जियो के पेटेंट पोर्टफोलियो में 6G से जुड़ी तकनीक भी शामिल है। कंपनी की कोशिश अगली मोबाइल टेक्नोलॉजी के विकास में सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल करने वाले देश के बजाय उसके मानक और तकनीक तैयार करने में भारत की भूमिका बढ़ाने की है। इससे भविष्य में तकनीक से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार और लाइसेंसिंग के अवसर भी बन सकते हैं।

जियो के लिए अगला दशक सिर्फ भारत को जोड़ने का नहीं, बल्कि भारत में तकनीक विकसित करने, उसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करके परखने और फिर दुनिया तक पहुंचाने का हो सकता है। स्वदेशी 5G स्टैक, हजारों पेटेंट, करोड़ों यूजर्स, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज, क्लाउड, AI और 6G से जुड़ी तकनीक के साथ कंपनी अब टेलीकॉम से आगे अपनी टेक्नोलॉजी क्षमता को वैश्विक बाजार तक ले जाने की दिशा में बढ़ रही है। इससे भारत के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने वाले बाजार से आगे बढ़कर तकनीक बनाने और निर्यात करने वाले देश के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

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