Tamil Nadu: तमिलनाडु में हिंदी साइनबोर्ड पर विवाद, दो राजमार्ग अधिकारियों पर गिरी गाज
Tamil Nadu: स्टेट हाईवे-93 पर हिंदी में लिखे शब्दों को लेकर कार्रवाई, सहायक अभियंता स्तर के दो अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू
Tamil Nadu: तमिलनाडु में एक राजमार्ग के साइनबोर्ड पर हिंदी में लिखे शब्दों को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद राज्य सरकार ने दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सरकार के मुताबिक साइनबोर्ड पर हिंदी का इस्तेमाल राज्य में लागू तमिल-अंग्रेजी की आधिकारिक दो-भाषा नीति के अनुरूप नहीं था। मामले में दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राजमार्ग विभाग के अधिकारियों को भाषा संबंधी सरकारी नीति का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। इसी क्रम में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
किस अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें थूथुकुडी जिले के नेशनल हाईवे सब-डिविजन में तैनात असिस्टेंट डिविजनल इंजीनियर एन. भूमिनाथन और कलाकाडु स्थित नेशनल हाईवे सेक्शन की असिस्टेंट इंजीनियर टी. मुथुलक्ष्मी शामिल हैं।
विभाग के मुताबिक टीवी न्यूज चैनलों पर साइनबोर्ड की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया। इसके बाद राजमार्ग विभाग के महानिदेशक के निर्देश पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
कहां लगा था विवादित साइनबोर्ड?
मामला स्टेट हाईवे-93 से जुड़ा है। साथनकुलम और नाजरेथ के आसपास लगाए गए एक साइनबोर्ड पर हिंदी में लिखावट दिखाई दी थी। यह मार्ग थूथुकुडी जिले के अलवारथिरुनगरी को तिरुनेलवेली जिले के वल्लियूर से जोड़ता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य की आधिकारिक दो-भाषा नीति के तहत ऐसे सरकारी संकेतकों में तमिल और अंग्रेजी के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाती है।
पहले भी हो चुका है भाषा को लेकर विवाद
तमिलनाडु में सड़क संकेतकों पर हिंदी के इस्तेमाल का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2017 में NHAI की ओर से कुछ साइनबोर्ड और माइलस्टोन पर हिंदी को शामिल किए जाने को लेकर राज्य में विरोध हुआ था।
उस समय तमिलनाडु में हिंदी के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। विरोध के बाद राजमार्गों पर संकेतकों में तमिल और अंग्रेजी के इस्तेमाल की व्यवस्था पर ही जोर दिया गया।
DMK ने सरकार पर उठाए सवाल
इस मामले को लेकर DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति को महत्वपूर्ण बताते हुए सरकार से इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं करने की बात कही।
स्टालिन ने आरोप लगाया कि राज्य ने पहले भी हिंदी को थोपे जाने के प्रयासों का विरोध किया है। उन्होंने मौजूदा घटनाक्रम को इसी संदर्भ से जोड़ते हुए सरकार की भाषा नीति पर सवाल उठाए।
हालांकि, सरकार की ओर से अधिकारियों के निलंबन को प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर बताया गया है और कहा गया है कि साइनबोर्ड पर हिंदी का इस्तेमाल निर्धारित नीति के अनुरूप नहीं था।
भाषा नीति फिर बनी राजनीतिक मुद्दा
तमिलनाडु में भाषा का सवाल लंबे समय से राजनीति का महत्वपूर्ण विषय रहा है। राज्य की आधिकारिक नीति तमिल और अंग्रेजी के इस्तेमाल पर आधारित है। ऐसे में सरकारी साइनबोर्ड पर किसी अन्य भाषा की मौजूदगी सामने आने पर राजनीतिक प्रतिक्रिया होना इस मुद्दे की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
फिलहाल दो अधिकारियों के निलंबन के साथ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित साइनबोर्ड पर हिंदी में लिखावट किस प्रक्रिया के तहत लगाई गई और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।



