Cyber Attack: चीन से जुड़े हैकर्स के दो खतरनाक टूल पर FBI का प्रहार, बिजली नेटवर्क और एयरपोर्ट थे निशाने पर
Cyber Attack: Microscan और FishHub के जरिए कंप्यूटर नेटवर्क में घुसपैठ का आरोप, अमेरिकी जांच एजेंसी ने हैकिंग ढांचे को किया निष्क्रिय; Flax Typhoon ग्रुप के चीन सरकार से संबंध होने का दावा
Cyber Attack: अमेरिका की जांच एजेंसी FBI ने चीन से जुड़े साइबर हैकिंग नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए Microscan और FishHub नाम के दो टूल को निष्क्रिय कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन टूल्स का इस्तेमाल अमेरिका सहित कई देशों के महत्वपूर्ण कंप्यूटर नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली कंपनियां, एयरपोर्ट, विश्वविद्यालय और अन्य जरूरी सेवाएं देने वाले संस्थान शामिल बताए गए हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग और FBI के अनुसार, ये टूल Flax Typhoon नाम के हैकिंग समूह से जुड़े थे। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस समूह के संबंध चीन सरकार से हैं। कार्रवाई का उद्देश्य हैकर्स की नेटवर्क तक पहुंच बाधित करना और महत्वपूर्ण संस्थानों पर संभावित साइबर हमलों के खतरे को कम करना बताया गया है।
Microscan: नेटवर्क की कमजोरियां खोजने वाला टूल
Microscan का इस्तेमाल कंप्यूटर नेटवर्क की जांच करने और उनमें मौजूद संभावित कमजोरियों का पता लगाने के लिए किया जाता था। FBI के अनुसार, हैकर्स इस टूल की मदद से ऐसे नेटवर्क तलाश सकते थे, जिन्हें निशाना बनाना अपेक्षाकृत आसान हो।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस टूल से जुड़ी गतिविधियों में अमेरिका की एक बिजली कंपनी के अलावा जापान और पोलैंड के एयरपोर्ट भी निशाने पर थे। इसके अतिरिक्त ताइवान के एक विश्वविद्यालय, जरूरी सेवाएं देने वाली कंपनियों और एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई।
बिजली आपूर्ति और हवाई परिवहन जैसे क्षेत्रों में कंप्यूटर नेटवर्क की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे नेटवर्क में सेंध लगने से सेवाओं के संचालन, संवेदनशील जानकारी और संस्थानों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
FishHub: फिशिंग के जरिए नेटवर्क तक पहुंच बनाने का आरोप
दूसरा टूल FishHub था, जिसका संबंध फिशिंग गतिविधियों से बताया गया है। फिशिंग एक ऐसी साइबर धोखाधड़ी है, जिसमें लोगों को भ्रामक संदेश, ईमेल या नकली वेबसाइट के जरिए संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए उकसाया जाता है।
FBI के मुताबिक, FishHub की मदद से हैकर्स को दूर बैठे कंप्यूटर नेटवर्क तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकती थी। इस तरह किसी दूसरे देश में मौजूद हमलावर भी इंटरनेट के जरिए निशाना बनाए गए सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश कर सकते थे।
हालांकि, किसी नेटवर्क में सफल घुसपैठ के लिए केवल एक टूल पर्याप्त नहीं होता। इसमें नेटवर्क की कमजोरियों, उपयोगकर्ताओं की गलतियों और अन्य तकनीकी तरीकों की भी भूमिका हो सकती है।
Flax Typhoon ग्रुप पर क्यों है अमेरिकी एजेंसियों की नजर?
अमेरिकी अधिकारियों ने Microscan और FishHub को Flax Typhoon नाम के साइबर हैकिंग समूह से जोड़ा है। अमेरिका का आरोप है कि इस समूह के चीन सरकार से संबंध हैं और इसकी गतिविधियां कई देशों के नेटवर्क के लिए खतरा बन सकती हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, चीन की Integrity Technology Group नाम की कंपनी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। FBI का दावा है कि कंपनी के चीन सरकार के साथ अनुबंध हैं और वह इस हैकिंग नेटवर्क से जुड़ी रही है। इन आरोपों को अमेरिकी अधिकारियों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2024 में भी हैकिंग नेटवर्क के खिलाफ हुई थी कार्रवाई
FBI ने सितंबर 2024 में भी Flax Typhoon से जुड़े एक बड़े साइबर नेटवर्क को निष्क्रिय करने की कार्रवाई की थी। उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने बताया था कि हैकर्स ने दो लाख से अधिक इंटरनेट से जुड़े उपकरणों को प्रभावित किया था।
इन उपकरणों में कैमरे, वीडियो रिकॉर्डर और घरों तथा कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट राउटर शामिल थे। ऐसे उपकरणों को संक्रमित करके एक बड़े नेटवर्क के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे साइबर सुरक्षा की भाषा में बॉटनेट कहा जाता है।
बॉटनेट का उपयोग दूसरे सिस्टम पर हमले करने, नेटवर्क गतिविधियों को छिपाने या अन्य साइबर अपराधों को अंजाम देने में किया जा सकता है। 2024 की कार्रवाई के बाद अब नए टूल्स को निष्क्रिय करने की घटना को उसी व्यापक साइबर सुरक्षा अभियान के संदर्भ में देखा जा रहा है।
FBI की रणनीति: हैकर्स के टूल और नेटवर्क पर सीधा वार
FBI अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी साइबर अपराधियों के नेटवर्क, उनके संसाधनों और इस्तेमाल किए जाने वाले टूल्स को निशाना बना रही है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, Microscan और FishHub को निष्क्रिय करने से हैकर्स की गतिविधियों में बाधा डालने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि आगे इस बात पर नजर रखी जाएगी कि संबंधित नेटवर्क दोबारा स्थापित करने की कोशिश होती है या नहीं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए ऐसी कार्रवाई महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी एक टूल को बंद कर देना हमेशा पूरे खतरे के खत्म होने की गारंटी नहीं होता।
महत्वपूर्ण संस्थानों की साइबर सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
बिजली कंपनियों, एयरपोर्ट और विश्वविद्यालयों के नेटवर्क में बड़ी मात्रा में संवेदनशील जानकारी होती है। इन प्रणालियों पर साइबर हमला होने से डेटा चोरी, सेवाओं में रुकावट और परिचालन संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इस मामले ने एक बार फिर दिखाया है कि साइबर सुरक्षा अब केवल निजी कंप्यूटर या व्यक्तिगत डेटा तक सीमित नहीं है। ऊर्जा, परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े नेटवर्क की सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुकी है।



