Amit Shah on Arvind Kejriwal: ‘केजरीवाल ने अपने कटआउट को यमुना में डुबकी लगवाई, वो भी बीमार’, अमित शाह का AAP पर हमला
दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए अमित शाह ने यमुना की सफाई, सीवेज प्रबंधन और पेयजल व्यवस्था को लेकर पिछली सरकार पर सवाल उठाए।
Amit Shah on Arvind Kejriwal: दिल्ली में यमुना नदी की सफाई और प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब 8,941 करोड़ रुपये बताई गई है। इस दौरान शाह ने यमुना की सफाई को लेकर पिछली सरकारों के कामकाज पर सवाल उठाए और केजरीवाल के यमुना में डुबकी लगाने के वादे पर तंज कसा।
अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल ने यमुना में डुबकी लगाने का वादा किया था, लेकिन खुद डुबकी लगाने के बजाय अपने कटआउट को नदी में डुबकी लगवाई। उन्होंने कटआउट को लेकर व्यंग्य करते हुए कहा कि वह भी बीमार हो गया और उसे AIIMS में भर्ती कराना पड़ा। शाह की इस टिप्पणी के साथ ही दिल्ली में यमुना की सफाई और राजनीतिक दलों के दावों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।
‘समय आने पर AAP के हर आरोप का जवाब दूंगा’
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार पर आरोप लगाया कि उसने आंदोलन के नाम पर सत्ता हासिल की, लेकिन यमुना की सफाई और दिल्ली की दूसरी समस्याओं पर पर्याप्त काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपनी विफलताओं के लिए बहाने बनाते हैं और केंद्र से मदद नहीं मिलने की बात कहते रहे हैं।
शाह ने अरविंद केजरीवाल को संबोधित करते हुए कहा कि उनके पास केजरीवाल की हर बात का जवाब है, लेकिन वह जवाब सही समय पर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता से हटाने के बाद वह इन आरोपों का जवाब देंगे।
गृह मंत्री की इस टिप्पणी को दिल्ली के साथ-साथ पंजाब की राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, AAP पर लगाए गए आरोपों और सरकारों के कामकाज का आकलन संबंधित आंकड़ों, योजनाओं और उपलब्धियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
यमुना में डुबकी लगाने के वादे पर साधा निशाना
अमित शाह ने अपने भाषण में यमुना की सफाई को लेकर केजरीवाल के पुराने वादे का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि केजरीवाल ने तीन बार यमुना में डुबकी लगाने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं किया। इसके बाद उन्होंने कटआउट वाली घटना का उल्लेख करते हुए तंज कसा।
शाह ने कहा कि यमुना के शुद्धिकरण के लिए उनकी सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू किया है। उन्होंने दिल्ली में सीवेज कनेक्शन बढ़ाने और घरों तक साफ पेयजल पहुंचाने का भी वादा किया।
यमुना नदी दिल्ली के लिए लंबे समय से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा रही है। नदी में गिरने वाला अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य प्रदूषक पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसलिए नदी की सफाई के लिए केवल घोषणाओं के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट, नालों के प्रबंधन और नियमित निगरानी जैसे उपायों का प्रभाव भी महत्वपूर्ण होगा।
8,941 करोड़ रुपये की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
अमित शाह ने दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनकी कुल लागत करीब 8,941 करोड़ रुपये बताई गई है। इन योजनाओं में गंदे पानी के शोधन, सीवेज प्रबंधन और पेयजल व्यवस्था से जुड़े काम शामिल हैं।
शाह के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सरकार बनने के बाद यमुना की सफाई को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उन्होंने दावा किया कि योजना के तहत 40 प्रतिशत से अधिक काम पूरा किया जा चुका है। इस दावे के संदर्भ में परियोजनाओं की प्रगति, पूरा किए गए कार्यों और शेष काम की विस्तृत जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली के हर घर को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ना और लोगों तक साफ पीने का पानी पहुंचाना है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करना और उनके परिणामों की निगरानी करना जरूरी होगा।
दो साल में कूड़े के पहाड़ों की जगह बगीचे का दावा
अमित शाह ने दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों को लेकर भी पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने इन पहाड़ों की ऊंचाई कम करने के लिए काम किया है। शाह ने कहा कि दो साल बाद संबंधित स्थानों पर लोगों को बगीचे दिखाई देंगे।
दिल्ली में कचरे का निस्तारण और लैंडफिल साइटों का प्रबंधन भी लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। कूड़े के पहाड़ों को हटाने के लिए पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण, नए कचरे का उचित प्रबंधन और जमीन के सुरक्षित उपयोग की व्यवस्था आवश्यक है। इसलिए सरकार के दावों का वास्तविक मूल्यांकन काम की प्रगति और पर्यावरणीय परिणामों के आधार पर किया जा सकेगा।
यमुना की सफाई पर सियासत के बीच जवाबदेही अहम
अमित शाह के बयान से साफ है कि यमुना की सफाई का मुद्दा दिल्ली में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बना हुआ है। भाजपा जहां अपनी योजनाओं और परियोजनाओं को लेकर उपलब्धियां गिना रही है, वहीं पिछली सरकारों के कामकाज पर सवाल उठा रही है।
लेकिन यमुना की सफाई का वास्तविक आकलन नदी के पानी की गुणवत्ता, सीवेज के शोधन, प्रदूषण के स्तर और परियोजनाओं के समय पर पूरा होने जैसे मानकों से किया जाना चाहिए। दिल्ली के नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इन योजनाओं से नदी कितनी साफ होती है और स्वच्छ पानी की उपलब्धता में कितना सुधार आता है।
फिलहाल, 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और अमित शाह के बयान के बाद यमुना की सफाई को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। आने वाले समय में इन योजनाओं की प्रगति और उनके वास्तविक नतीजों पर नजर रहेगी।



