Free Umar Khalid: जेएनयू में ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘नक्सलबाड़ी’ के नारे लिखे जाने से विवाद की चर्चा तेज।
Free Umar Khalid: दिल्ली के विश्वविद्यालय परिसरों में नारों को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘नक्सलबाड़ी’ जैसे नारे लिखे जाने की खबर चर्चा में है। इस घटनाक्रम ने कैंपस में छात्र राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैचारिक मतभेदों को लेकर बहस तेज कर दी है।
जेएनयू में नारों को लेकर क्यों हो रही चर्चा?
उमर खालिद दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में लंबे समय से जेल में बंद हैं। उनके समर्थन में ‘फ्री उमर खालिद’ का नारा पहले भी छात्र राजनीति और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहा है। वहीं, ‘नक्सलबाड़ी’ का संबंध भारत में वामपंथी आंदोलन के इतिहास से है। पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र से 1967 में शुरू हुआ किसान आंदोलन आगे चलकर नक्सल आंदोलन के रूप में पहचाना गया।
जेएनयू में लिखे गए नारों को लेकर विवाद की पूरी पृष्ठभूमि और प्रशासन की प्रतिक्रिया की पुष्टि जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि नारे किस स्थान पर लिखे गए, इनके पीछे कौन था और विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कार्रवाई की।
जामिया के बाद जेएनयू में सामने आए इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीतिक विचारों की अभिव्यक्ति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में किसी संगठन या छात्र समूह की भूमिका की पुष्टि किए बिना किसी पर जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा।



