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Electric Diya: पानी की एक बूंद से जगमगा उठते हैं इलेक्ट्रिक दीये, न तेल की जरूरत न बाती की; जानें कैसे काम करती है तकनीक

Electric Diya: छोटे बटन सेल, LED और वॉटर सेंसर की मदद से जलते हैं ये दीये, पानी डालते ही इलेक्ट्रॉनिक सर्किट पूरा होकर रोशनी देने लगता है

Electric Diya: दिवाली पर घरों को रोशन करने के लिए लोग पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ-साथ कई तरह की आधुनिक लाइटों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। बाजार में अब ऐसे इलेक्ट्रिक दीये भी मिल रहे हैं, जिन्हें जलाने के लिए न तेल की जरूरत होती है और न ही रूई की बाती की। इन दीयों में कोई सामान्य ऑन-ऑफ बटन भी नहीं होता। इनमें बस थोड़ा-सा पानी डालते ही LED जलने लगती है।

पहली नजर में यह किसी जादू जैसा लग सकता है, क्योंकि आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पानी से दूर रखने की सलाह दी जाती है। लेकिन इन दीयों की बनावट इस तरह की होती है कि पानी इनके सर्किट को सक्रिय करने का काम करता है। इनके अंदर छोटी बैटरी, LED, मेटल पिन और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट लगाए जाते हैं। आइए समझते हैं कि पानी डालते ही ये दीये कैसे रोशनी देने लगते हैं।

दीये के अंदर छिपा होता है छोटा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट

पानी से जलने वाले इलेक्ट्रिक दीये के ऊपरी हिस्से में एक छोटी LED लाइट लगी होती है। इसके पास दो छोटे मेटल पॉइंट या पिन दिखाई देते हैं। इन्हें इलेक्ट्रोड या वॉटर सेंसर की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

दीये के निचले हिस्से में आमतौर पर घड़ी या छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली बटन सेल बैटरी लगाई जाती है। इसके साथ एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट भी होता है।

जब दीया सूखा रहता है, तब दोनों मेटल पिनों के बीच संपर्क नहीं बनता। इस वजह से सर्किट खुला रहता है और बैटरी से LED तक करंट का प्रवाह नहीं हो पाता। इसलिए दीया बंद रहता है।

पानी की बूंद से कैसे पूरा हो जाता है सर्किट?

इन दीयों के काम करने के पीछे पानी की विद्युत चालकता यानी इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी की भूमिका होती है। सामान्य नल के पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और सोडियम जैसे खनिजों के आयन घुले हो सकते हैं। यही आयन पानी को कुछ हद तक बिजली का संचालन करने योग्य बनाते हैं।

जब दीये में पानी डाला जाता है, तो वह दोनों मेटल पिनों के बीच पहुंच जाता है। पानी में मौजूद आयन इन पिनों के बीच विद्युत संपर्क बनाने में मदद करते हैं। इससे सेंसर सर्किट को संकेत मिलता है कि दीये में पानी मौजूद है।

इसके बाद अंदर लगा ट्रांजिस्टर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक स्विचिंग सर्किट सक्रिय हो जाता है। यह बैटरी की ऊर्जा LED तक पहुंचाने का रास्ता खोल देता है। इसी प्रक्रिया के कारण पानी डालते ही दीया रोशनी देने लगता है।

हर तरह का पानी डालने पर नहीं जलते ये दीये

इन इलेक्ट्रिक दीयों के इस्तेमाल में पानी की गुणवत्ता भी मायने रख सकती है। सामान्य नल के पानी में घुले खनिजों के कारण विद्युत चालकता मौजूद रहती है। वहीं, डिस्टिल्ड या बहुत कम खनिज वाला पानी इस्तेमाल करने पर कुछ मॉडलों में सेंसर को पर्याप्त संकेत नहीं मिल पाता।

ऐसी स्थिति में दीया जलने में परेशानी हो सकती है या उसकी रोशनी ठीक से काम नहीं कर सकती। हालांकि, हर मॉडल की तकनीक और सेंसर की संवेदनशीलता अलग हो सकती है। इसलिए पानी के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी के लिए उत्पाद के साथ दिए गए निर्देशों को देखना चाहिए।

LED और बटन सेल से मिलती है रोशनी

इन दीयों में LED लाइट का इस्तेमाल किया जाता है। LED कम बिजली में रोशनी देने के लिए जानी जाती है, इसलिए छोटी बैटरी से भी इन्हें चलाया जा सकता है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ मॉडलों में तीन छोटे बटन सेल लगाए जाते हैं और उनसे करीब 40 से 50 घंटे तक का बैकअप मिलने का दावा किया जाता है। वास्तविक बैकअप बैटरी की क्षमता, LED की खपत और दीये के डिजाइन पर निर्भर करता है।

बैटरी खत्म होने पर कई मॉडलों में नीचे लगा ढक्कन खोलकर सेल बदले जा सकते हैं। खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित दीये में बैटरी बदलने की सुविधा उपलब्ध है या नहीं।

दीया बंद कैसे करें और इस्तेमाल में क्या सावधानी रखें?

इन दीयों को बंद करने का तरीका भी सामान्य इलेक्ट्रिक लाइट से अलग होता है। जब पानी हटा दिया जाता है और दोनों मेटल पिनों के बीच संपर्क टूट जाता है, तो सर्किट निष्क्रिय हो जाता है। इसके बाद LED बंद हो जाती है।

इस्तेमाल के दौरान कुछ सावधानियां रखना जरूरी है:

  • दीये में उतना ही पानी डालें, जितना निर्माता ने निर्देशित किया हो।
  • बैटरी वाले हिस्से को पानी में न डुबोएं।
  • दीये को बंद करने के बाद पानी हटाकर बाहरी हिस्से को सूखे कपड़े से साफ करें।
  • बैटरी बदलते समय सही प्रकार और आकार के सेल का इस्तेमाल करें।
  • बच्चों की पहुंच से छोटी बटन सेल बैटरियों को दूर रखें, क्योंकि इन्हें निगलना बेहद खतरनाक हो सकता है।
  • दीये को लंबे समय तक पानी में छोड़ने से बचें, जब तक निर्माता ने इसकी अनुमति न दी हो।

आधुनिक तकनीक से बदले दिवाली के दीयों के विकल्प

दिवाली पर पारंपरिक मिट्टी के दीयों का अपना सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। वहीं, पानी से सक्रिय होने वाले इलेक्ट्रिक दीये तकनीक का एक अलग उदाहरण पेश करते हैं। इनमें पानी सेंसर को सक्रिय करने का माध्यम बनता है, जबकि वास्तविक ऊर्जा बैटरी से मिलती है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ये दीये पानी से बिजली बनाते हैं। दरअसल, पानी सर्किट को पूरा करने या सेंसर को संकेत देने में मदद करता है और बैटरी LED को जलाने के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराती है। यही छोटी-सी इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था इन दीयों को खास बनाती है।

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