Bhadohi: भदोही को फिर मिली संत रविदास नगर की पहचान, सीएम योगी ने 1340 करोड़ की परियोजनाओं के बीच

Bhadohi: मुख्यमंत्री ने कहा- अब हमारा भदोही जिला ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा, 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी

Bhadohi: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के नाम को लेकर लंबे समय से चली आ रही चर्चा के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बड़ा ऐलान किया। भदोही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। इससे जिले के नाम को लेकर एक बार फिर बदलाव की प्रक्रिया चर्चा में आ गई है।

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा ऐसे समय की, जब वह भदोही जिले में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे थे। कार्यक्रम में 112 परियोजनाओं, जिनकी कुल लागत 1,340 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है, का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया।

संत रविदास के नाम से जुड़ेगा जिले का नाम

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब भदोही जिले की पहचान संत रविदास नगर भदोही के रूप में होगी। इससे पहले जुलाई 2026 में भी मुख्यमंत्री ने भदोही का नाम दोबारा संत रविदास नगर करने की घोषणा की थी।

यह नाम परिवर्तन संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े आयोजनों के दौरान घोषित किया गया था। सरकार की ओर से इसे संत रविदास की विरासत और उनके सामाजिक संदेश से जोड़कर देखा गया है।

पहले भी बदला जा चुका है जिले का नाम

भदोही का नाम बदलने का इतिहास नया नहीं है। मायावती सरकार के कार्यकाल में जिले का नाम संत रविदास नगर किया गया था। इसके बाद अखिलेश यादव सरकार के दौरान इसे फिर से भदोही नाम से जाना जाने लगा। अब योगी सरकार ने संत रविदास नगर नाम की वापसी का ऐलान किया है।

इस तरह करीब एक दशक से अधिक समय के बाद जिले के नाम को लेकर एक बार फिर बदलाव की प्रक्रिया सामने आई है।

112 परियोजनाओं की सौगात

नाम परिवर्तन के ऐलान के साथ मुख्यमंत्री ने जिले को विकास परियोजनाओं की भी बड़ी सौगात दी। कार्यक्रम में 112 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं की कुल लागत 1,340 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

इन परियोजनाओं का संबंध जिले के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से है। सरकार की ओर से इन्हें क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों को गति देने से जोड़कर देखा जा रहा है।

कालीन उद्योग के लिए देश-दुनिया में पहचान

भदोही को देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कालीन उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। जिले की अर्थव्यवस्था में हाथ से बुने कालीन और इससे जुड़े कारोबार की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिला प्रशासन भी भदोही को ‘कार्पेट सिटी’ के रूप में पहचानता है।

ऐसे में जिले के नाम और पहचान से जुड़े किसी भी फैसले का सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी असर देखा जाता है।

नाम बदलने की प्रक्रिया पर भी नजर

हालांकि मुख्यमंत्री की घोषणा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी जिले का आधिकारिक नाम बदलने के लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है। जुलाई में भी मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नाम परिवर्तन को लेकर यही प्रक्रिया चर्चा में रही थी।

अब सरकार की ओर से आगे की औपचारिक कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड में नाम किस रूप में दर्ज किया जाएगा।

जिले की पहचान को लेकर फिर शुरू हुई चर्चा

भदोही का नाम संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा के साथ उत्तर प्रदेश में जिलों के नाम बदलने की राजनीति और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में जिलों के नाम बदलने और पुराने नाम बहाल करने के फैसले होते रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ताजा ऐलान के बाद अब भदोही की आधिकारिक पहचान को लेकर अगली प्रशासनिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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