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Delhi MCD News: दिल्ली MCD में BJP-AAP पार्षदों के बीच जमकर हंगामा, फाइलें फेंकीं और माइक तोड़ने की कोशिश; VIDEO वायरल

विकास निधि जारी करने की मांग पर नगर निगम सदन में हंगामा, महापौर प्रवेश वाही को सुरक्षा के बीच बाहर निकालना पड़ा; अनुशासन समिति करेगी जांच।

Delhi MCD News: दिल्ली नगर निगम (MCD) के सदन में विकास निधि जारी करने की मांग को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी के पार्षदों के बीच जमकर हंगामा हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि सदन में धक्का-मुक्की, माइक छीनने और फाइलें फेंकने तक की नौबत आ गई। हंगामे के दौरान पार्षद एक-दूसरे पर चिल्लाते और पानी फेंकते नजर आए। सदन में हुए इस बवाल का वीडियो भी सामने आया है।

दिल्ली MCD की बैठक में गुरुवार को प्रदूषण समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होनी थी, लेकिन विकास निधि को लेकर शुरू हुई बहस ने देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया। भाजपा और आम आदमी पार्टी के पार्षद आमने-सामने आ गए। हालात बिगड़ने पर मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। इस दौरान महापौर प्रवेश वाही को भी सुरक्षा के बीच सदन से बाहर निकालना पड़ा।

विकास निधि को लेकर क्यों भिड़े BJP और AAP के पार्षद?

दिल्ली नगर निगम के सदन में हंगामे की मुख्य वजह पार्षदों के वार्डों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली निधि रही। आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने मांग की कि उनके वार्डों में विकास कार्य कराने के लिए फंड जल्द जारी किया जाए। उनका आरोप था कि पार्षदों को मिलने वाली निर्धारित राशि पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि भाजपा ने प्रत्येक पार्षद को दो करोड़ रुपये देने का वादा किया था, लेकिन अब तक केवल 50 लाख रुपये ही दिए गए हैं। इसी मुद्दे पर AAP पार्षदों ने तत्काल अधिक राशि जारी करने की मांग उठाई।

वहीं, महापौर प्रवेश वाही ने सदन में तत्काल 25 लाख रुपये देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में पार्षदों को कुल दो करोड़ रुपये दिए जाएंगे। हालांकि, आम आदमी पार्टी के पार्षद इस घोषणा से संतुष्ट नहीं हुए। उनकी मांग थी कि तत्काल जारी की जाने वाली राशि को बढ़ाकर कम से कम एक करोड़ रुपये किया जाए।

फंड जारी करने की मांग और महापौर की घोषणा के बीच सहमति नहीं बन सकी। देखते ही देखते सदन में नारेबाजी और तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने बाद में हंगामे का रूप ले लिया।

माइक छीनने से लेकर फाइलें फेंकने तक की नौबत

सदन के भीतर सामने आए वीडियो में पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की दिखाई दे रही है। वीडियो में कुछ पार्षद एक-दूसरे से माइक छीनने की कोशिश करते नजर आते हैं, जबकि फाइलें फेंके जाने और पानी फेंकने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आम आदमी पार्टी की महिला पार्षद शगुफ्ता चौधरी, जिन्हें शगुफ्ता जुबैर के नाम से भी जाना जाता है, समेत कुछ पार्षद महापौर की कुर्सी के पास पहुंच गए। आरोप है कि इस दौरान माइक तोड़ने की कोशिश भी की गई।

हंगामा बढ़ने पर मार्शलों को बीच-बचाव करना पड़ा। सदन में मौजूद पार्षदों के बीच खींचतान के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। महापौर को सुरक्षा के बीच बाहर निकालने की नौबत आने से निगम की बैठक में बने तनावपूर्ण माहौल का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कांग्रेस नेता नाजिया दानिश के बयान के बाद और बढ़ा विवाद

MCD सदन में विवाद केवल भाजपा और आम आदमी पार्टी के पार्षदों तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस नेता नाजिया दानिश के बयान के बाद भी माहौल गरमा गया। इस दौरान नाजिया दानिश और AAP नेता अंकुश नारंग के बीच तीखी बहस हुई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाजिया दानिश ने आम आदमी पार्टी के रुख पर सवाल उठाए। इसके जवाब में अंकुश नारंग ने उन पर भाजपा के साथ मिले होने का आरोप लगाया। इस पर नाजिया दानिश ने पलटवार करते हुए कहा कि वह शगुफ्ता चौधरी नहीं हैं, जो भाजपा में चली जाएंगी।

इस बयान के बाद सदन में पहले से जारी तनाव और बढ़ गया। विकास निधि के मुद्दे पर शुरू हुई बहस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई और कार्यवाही के दौरान अनुशासन बनाए रखना मुश्किल हो गया।

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हंगामे के बाद पार्षदों पर हो सकती है कार्रवाई

सदन में हुए हंगामे के बावजूद महापौर प्रवेश वाही ने किसी तरह एजेंडे को पास कराया। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। मामले में अनुचित व्यवहार और सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोपों की जांच के लिए अनुशासन समिति को कहा गया है।

समिति की रिपोर्ट आने के बाद संबंधित पार्षदों के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, कार्रवाई का अंतिम फैसला जांच और संबंधित प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

दिल्ली नगर निगम में हुआ यह हंगामा एक बार फिर स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों के आचरण पर सवाल खड़े करता है। वार्डों में विकास कार्यों के लिए फंड जारी करने का मुद्दा सीधे तौर पर नागरिक सुविधाओं से जुड़ा है। ऐसे में सदन के भीतर विवाद और हंगामे के कारण कामकाज प्रभावित होने से विकास संबंधी फैसलों में देरी की आशंका भी पैदा होती है।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विकास निधि को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच गतिरोध कैसे दूर होता है और सदन में हुए हंगामे पर अनुशासन समिति क्या कार्रवाई करती है।

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