युवाओं की दहाड़ के आगे झुका तंत्र! नीट पेपर लीक पर घिरे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जानें क्या है पूरा मामला

सोनम वांगचुक का अनशन और जंतर-मंतर का उग्र प्रदर्शन लाया रंग, शिक्षा मंत्री को छोड़ना पड़ा पद

देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के कोने-कोने तक गूंज रही छात्रों की आवाज़ ने आखिरकार सत्ता के गलियारों को हिला कर रख दिया है। नीट-यूजी परीक्षा (NEET-UG Exam) में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर पिछले एक महीने से सड़कों पर उतरे छात्रों के भारी विरोध के आगे सरकार को झुकना पड़ा है। बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजते हुए स्पष्ट किया है कि पिछले कुछ दिनों से देश में जो हालात बने हैं, उससे उनका मन आहत है और वे किसी भी कीमत पर देश के मेधावी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देना चाहते।

क्यों भड़का था युवाओं का गुस्सा? 

पूरा विवाद तब गहराया जब 3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां और पेपर लीक के मामले सामने आए। हालांकि, सरकार ने मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करवाई। इसके बावजूद छात्रों का आक्रोश शांत नहीं हुआ।

छात्रों का आरोप था कि परीक्षा माफियाओं की पैठ और प्रशासनिक चूक के कारण लाखों मेहनती विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन जारी रहे और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस मुद्दे पर 26 दिनों तक लंबी भूख हड़ताल कर दी। देखते ही देखते यह आंदोलन देशव्यापी रूप ले चुका था।

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में क्या कहा? 

अपने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि उन्होंने पहले दिन से इस पूरी परिस्थिति की जिम्मेदारी ली है और कभी भी इससे मुंह नहीं मोड़ा।

  • छात्रों का भविष्य सर्वोपरी: प्रधान ने कहा, “पिछले 10 दिनों की घटनाएं देखकर मेरा मन दुखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही इस देश की असली ताकत है।”

  • राष्ट्र विरोधी ताकतों से बचने की अपील: उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों से अपील की कि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और इस स्थिति का कोई भी राष्ट्र विरोधी ताकत फायदा न उठाने पाए।

  • परीक्षा प्रणाली में बदलाव: सरकार ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि अगले साल से नीट परीक्षा को पूरी तरह से सीबीटी (Computer-based-test) मोड में कराया जाएगा ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

Dharmendra Pradhan Resignation: NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, युवाओं को लिखी चिट्ठी में बोले- ’10 दिन से मन दुखी था’

राजनीतिक हलचल और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की प्रतिक्रिया

शिक्षा मंत्री के इस बड़े इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से मोर्चा संभाले बैठी कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पार्टी या संगठन की नहीं, बल्कि देश के हर उस छात्र की जीत है जिसने धूप और बारिश में खड़े होकर अपने हक की लड़ाई लड़ी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि जब देश का युवा और छात्र अपनी पढ़ाई और अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाता है, तो शासन-प्रशासन को उनकी मांगों के आगे झुकना ही पड़ता है।

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