FCRA संशोधन पर नगालैंड CM ने जताई चिंता, अमित शाह से बोले- पुनर्विचार करें सरकार

नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर FCRA में प्रस्तावित बदलावों पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से चर्चों और धर्मार्थ संगठनों पर वित्तीय व प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है।

नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर केंद्र सरकार के सामने चिंता जताई है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर संशोधनों की व्यापक समीक्षा की मांग की है।

रियो ने सुझाव दिया कि FCRA संशोधन विधेयक 2026 को संसदीय समिति के पास भेजा जाए, ताकि चर्चों, धर्मार्थ संस्थाओं और अन्य संबंधित पक्षों को अपनी चिंताएं रखने का अवसर मिल सके। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ-साथ राष्ट्रीय हितों को भी बेहतर तरीके से सुरक्षित किया जा सकेगा।

चर्चों और धर्मार्थ संगठनों पर असर की आशंका

मुख्यमंत्री ने कहा कि नगालैंड में चर्च लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। खासकर दूरदराज और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में इन संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

रियो के मुताबिक, FCRA के नियमों में लगातार बढ़ती सख्ती से पहले ही इन संगठनों पर वित्तीय और प्रशासनिक दबाव है। प्रस्तावित संशोधन लागू होने पर यह बोझ और बढ़ सकता है, जिससे कई सामाजिक और कल्याणकारी कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका है।

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मार्च में लोकसभा में पेश हुआ था विधेयक

FCRA संशोधन विधेयक 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। वहीं, जून में सरकार ने विदेशी अंशदान से जुड़े संशोधित FCRA नियम भी अधिसूचित किए थे।

नगालैंड के मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के चर्च संगठनों की ओर से भी इन प्रस्तावित बदलावों को लेकर केंद्र के सामने चिंता जताई गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस अपील पर क्या रुख अपनाती है और संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान इन चिंताओं को किस तरह संबोधित किया जाता है।

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