Pakistan/China News: चीनी कंपनी के दबाव में झुकी सरकार? गधों के मांस निर्यात को मिली हरी झंडी

चीन की बढ़ती मांग और निवेश के दबाव के बीच पाकिस्तान सरकार का त्वरित फैसला, ग्वादर से होगा बड़े पैमाने पर निर्यात

Pakistan/China News: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने एक बार फिर चीन के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को प्राथमिकता देते हुए बड़ा फैसला लिया है। एक चीनी कंपनी के दबाव के बाद पाकिस्तान ने आनन-फानन में गधों के मांस के निर्यात को मंजूरी दे दी। इस फैसले ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई है, बल्कि पाकिस्तान की नीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

चीन के दबाव में तेज हुआ फैसला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला लंबे समय से अटका हुआ था। लेकिन जब चीनी कंपनी Hangeng Trade Company ने पाकिस्तान में अपना कारोबार बंद करने की चेतावनी दी, तो सरकार हरकत में आ गई।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के कुछ ही घंटों के भीतर कैबिनेट से मंजूरी मिल गई और पशु क्वारंटाइन विभाग ने भी निर्यात की अनुमति दे दी।

ग्वादर से चल रहा है पूरा ऑपरेशन

यह चीनी कंपनी ग्वादर के नॉर्थ फ्री जोन में काम कर रही है। यहां गधों के मांस और खाल के निर्यात के लिए विशेष बूचड़खाना स्थापित किया गया है।

कंपनी का दावा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय फूड सेफ्टी मानकों को पूरा किया है, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण उसका निर्यात लंबे समय से रुका हुआ था।

क्यों है चीन में गधों की इतनी मांग?

चीन में गधों के मांस के साथ-साथ उनकी खाल की भी भारी मांग है। खासतौर पर एक पारंपरिक दवा एजियाओ बनाने में इसका उपयोग होता है।

इस दवा को शरीर की ताकत बढ़ाने, एनीमिया और रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि चीन बड़े पैमाने पर पाकिस्तान से गधे खरीद रहा है।

पाकिस्तान में बढ़ीं गधों की कीमतें

निर्यात बढ़ने के कारण पाकिस्तान में गधों की कीमतों में भी तेजी आई है। देश पहले ही दुनिया में गधों की बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है, और अब यह एक नए निर्यात बाजार के रूप में उभर रहा है।

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चीन यात्रा से पहले सुलझाया गया मामला

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महीने के अंत में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की चीन यात्रा प्रस्तावित है। ऐसे में यह मुद्दा वहां उठ सकता था, जिससे बचने के लिए इसे “इमरजेंसी स्तर” पर सुलझाया गया।

क्या कहता है यह फैसला?

यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किस हद तक विदेशी निवेश, खासकर चीन पर निर्भर होती जा रही है।

एक तरफ सरकार इसे व्यापार और रोजगार बढ़ाने का मौका बता रही है, वहीं दूसरी तरफ आलोचक इसे “नीतिगत दबाव में लिया गया फैसला” मान रहे हैं।

गधों के मांस के निर्यात की मंजूरी सिर्फ एक व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि पाकिस्तान-चीन संबंधों की गहराई और निर्भरता को भी दर्शाती है।

अब देखने वाली बात होगी कि यह फैसला पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कितना फायदा पहुंचाता है और क्या इससे जुड़े नैतिक व सामाजिक सवाल आगे और तेज होंगे।

Written By: Anushri Yadav

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