Health Update: घोसी का 100 बेड अस्पताल खुद बीमार: अल्ट्रासाउंड-सीटी स्कैन नहीं, महिला डॉक्टरों की भारी कमी
मऊ के टंडियाव स्थित 100 बेड अस्पताल में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, मरीजों को निजी सेंटरों और जिला अस्पताल का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
Health Update: उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। मऊ जिले के घोसी ब्लॉक अंतर्गत टंडियाव में बना 100 बेड का विशाल अस्पताल आज स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता के चलते खुद बीमार नजर आ रहा है। करोड़ों की लागत से खड़ी की गई यह आलीशान इमारत आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण सफेद हाथी साबित हो रही है।
सुविधाओं के नाम पर न अल्ट्रासाउंड, न सीटी स्कैन
आस-पास के दर्जनों गांवों की स्वास्थ्य उम्मीदों का केंद्र माना जाने वाला यह अस्पताल बुनियादी जांच सुविधाओं के लिए तरस रहा है। इतने बड़े अस्पताल में न तो अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है और न ही सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है। इसके चलते गरीब मरीजों को मामूली जांचों के लिए भी निजी सेंटरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
महिला डॉक्टरों की भारी कमी, भगवान भरोसे प्रसूताएं
अस्पताल की सबसे दयनीय स्थिति महिला स्वास्थ्य सेवाओं की है। अस्पताल में एक भी गाइनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) डॉक्टर तैनात नहीं है। इसके कारण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को आपातकालीन परिस्थितियों में मऊ जिला अस्पताल अथवा निजी नर्सिंग होम के लिए रेफर कर दिया जाता है।
रास्ते में होने वाली दिक्कतों और समय की बर्बादी के कारण कई बार मरीजों की जान पर भी बन आती है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान भी इस गंभीर समस्या की ओर नहीं जा रहा है।
सीएमएस ने कहा: शासन को कई बार लिखा पत्र, फिर भी नहीं मिली गाइनेकोलॉजिस्ट
इस पूरे मामले पर जब अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश चंद्रा से बात की गई तो उन्होंने अपनी लाचारी और विभागीय प्रयासों को सामने रखा।
सीएमएस डॉ. दिनेश चंद्रा ने बताया कि अस्पताल में सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए शासन-प्रशासन को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। विशेष रूप से गाइनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर की तैनाती के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अब तक किसी महिला डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो सकी है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार सीएमएस डॉ. दिनेश चंद्रा अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन शासन स्तर से पर्याप्त बजट और मानव संसाधन (स्टाफ) न मिलने के कारण उनके प्रयास भी सीमित होकर रह गए हैं।
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बढ़ रहा आक्रोश
क्षेत्रीय जनता में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज इस 100 बेड के अस्पताल की दुर्दशा पर मौन साधे हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही टंडियाव अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तथा महिला डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई, तो क्षेत्र की जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी।



