International News: UNSC Reform पर भारत की दो टूक! ताकत नहीं, आपसी तालमेल से होगा बदलाव; पाकिस्तान को भी सुनाई खरी-खरी

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि P. Harish ने कहा कि UNSC आज भी 1945 की सोच में अटका हुआ है। भारत ने सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार, पारदर्शिता और नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने की मांग दोहराई।

International News: United Nations में भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधारों की जोरदार मांग उठाई है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक खुली बहस के दौरान भारत ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती और अभी भी 1945 के दौर में अटकी हुई है।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है और UNSC में सुधार अब टाले नहीं जा सकते।


“UNSC जीवाश्म नहीं, जीवंत संस्था होनी चाहिए”

भारतीय राजनयिक पी. हरीश ने साफ शब्दों में कहा कि सुरक्षा परिषद को अधिक पारदर्शी और प्रतिनिधित्व वाला बनाना होगा। उन्होंने कहा:

“UNSC को एक जीवंत संस्था होना चाहिए, न कि कोई जीवाश्म।”

उन्होंने सदस्यता की स्थायी श्रेणी के विस्तार की मांग करते हुए कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में वास्तविक बदलाव तभी आएगा जब नए देशों को स्थायी सदस्य बनाया जाएगा।

भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है और उसका कहना है कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और उभरती आर्थिक शक्ति होने के बावजूद उसे अब तक उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

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“दूसरा विश्व युद्ध हमारा नहीं था, फिर भी कीमत भारत ने चुकाई”

पी. हरीश ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है और उसने हमेशा बहुपक्षवाद तथा वैश्विक शांति का समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि दूसरा विश्व युद्ध भारत का युद्ध नहीं था, लेकिन इसके बावजूद भारत ने भारी कीमत चुकाई। उपनिवेशवाद की राजनीति के कारण भारत के योगदान को वह पहचान नहीं मिली जिसकी वह हकदार था।

भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि भारत ने कभी भी संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक सहयोग में अपना विश्वास नहीं खोया।


“ताकत नहीं, सहयोग से मजबूत होगा बहुपक्षवाद”

भारत ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि केवल ताकत और दबाव के जरिए मजबूत वैश्विक व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती।

पी. हरीश ने कहा कि:

“मजबूत बहुपक्षवाद के लिए सहयोग, आपसी समझ और वैश्विक हितों के लिए समझौते की भावना जरूरी है।”

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक तनावों और युद्धों का सामना कर रही है।


पाकिस्तान पर भी साधा निशाना

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के मुद्दे पर भी पाकिस्तान को घेरा। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद आज वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

भारत ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को प्रायोजित और समर्थन देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

हालांकि भारत ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उसका इशारा साफ तौर पर पाकिस्तान की ओर माना जा रहा है।

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