JPSC पेपर लीक मामले में CID का बड़ा एक्शन, लालू यादव हिरासत में; भाई प्रदीप यादव पर भी कसा शिकंजा

रांची, हजारीबाग, बोकारो और पलामू समेत 18 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी, परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े डिजिटल दस्तावेज और अहम सबूत जब्त

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्य की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची, हजारीबाग, बोकारो और पलामू समेत कई जिलों में एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान हजारीबाग से लालू यादव और उनके भाई प्रदीप यादव को हिरासत में लिया गया है।

CID की इस कार्रवाई के बाद परीक्षा से जुड़े विभागों, अधिकारियों और कोचिंग संस्थानों में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसियां कथित धांधली से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं।

18 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

CID की टीम ने राज्यभर में करीब 18 से 20 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान परीक्षा संचालन, OMR शीट मूल्यांकन, डेटा प्रोसेसिंग और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लोगों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, हार्ड डिस्क, लैपटॉप, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जाएगी।

हजारीबाग से लालू यादव और प्रदीप यादव हिरासत में

हजारीबाग जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र स्थित पौता गांव में राजेंद्र यादव के घर CID ने दबिश दी। छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये के चेक, उत्पाद सिपाही परीक्षा के एडमिट कार्ड और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए।

इसके बाद राजेंद्र यादव के बेटों लालू यादव और प्रदीप यादव को हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच के अनुसार, एक भाई का चयन JPSC परीक्षा में हुआ था, जबकि दूसरे पर कथित तौर पर परीक्षा नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है।

कोचिंग संचालकों और एजेंसी पर भी कार्रवाई

CID ने परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा है। एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी और प्रोग्रामर उस्मान से पूछताछ की जा रही है।

इसके अलावा कई कोचिंग संचालकों और कथित बिचौलियों के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं थी।

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OMR शीट भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान CID ने कुछ अभ्यर्थियों की OMR शीट भी मांगी। अधिकारियों के मुताबिक, एक अभ्यर्थी अपनी OMR शीट उपलब्ध नहीं करा सका और उसके जवाब को संदिग्ध माना गया है। अब इस पहलू की भी गहन जांच की जा रही है।

जांच से बढ़ सकती हैं कई और मुश्किलें

CID का मानना है कि डिजिटल उपकरणों और जब्त दस्तावेजों की जांच के बाद इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में पेपर लीक या भर्ती घोटाले के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

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