एंटी-पेपर लीक बिल पर किरेन रिजिजू की विपक्ष से अपील, बोले- हंगामा नहीं, संसद में हो खुली चर्चा
लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने और छात्रों के हित में कानून बनाने में सहयोग की अपील की।
लोकसभा में सोमवार (27 जुलाई) को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किए जाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से सदन में हंगामा छोड़कर इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह कानून सीधे तौर पर देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और इसे पारित कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
हालांकि, विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण विधेयक पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी और लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
‘छात्रों के भविष्य पर राजनीति न हो’
किरेन रिजिजू ने कहा कि हाल के वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की दिशा में यह संशोधन विधेयक पेश किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही परीक्षा सुधारों के लिए टास्क फोर्स का गठन कर चुकी है और अब एक ऐसा कानून लाई है, जिसमें पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी और समयबद्ध कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। ऐसे में यदि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर भी चर्चा नहीं होने दी जाती, तो यह देश के छात्रों के लिए गलत संदेश होगा।
‘संसद से बेहतर चर्चा का कोई मंच नहीं’
रिजिजू ने कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए संसद में खुली और सार्थक बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संसद ही वह सर्वोच्च मंच है, जहां राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा होती है। इसलिए विरोध प्रदर्शन के बजाय विपक्ष को अपनी बात बहस के माध्यम से रखनी चाहिए।
बिल में क्या है खास?
सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधन विधेयक में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं।
मुख्य प्रावधान:
- पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर 5 से 10 वर्ष तक की जेल।
- दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना।
- सभी मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना का प्रस्ताव।
- आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य।
सरकार का दावा है कि इन प्रावधानों से प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी।
विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?
विपक्ष पहले NEET विवाद को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा था। अब विपक्ष का कहना है कि छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग के मामले में सरकार को जवाब देना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार संसद में विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
इसी बीच सरकार का कहना है कि परीक्षा सुधार और छात्रों के हित से जुड़े इस विधेयक पर राजनीति से ऊपर उठकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश में निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।



