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State News: सत्गुरु आश्रम में मुलाकात, फिर शादी… अब साधना के लिए यूनिवर्सिटी खोलेंगे ‘IITian बाबा’ — जानिए पूरी कहानी

IIT से आध्यात्म तक का सफर तय करने वाले अभय सिंह ने बेंगलुरु की इंजीनियर प्रीतिका से रचाई शादी, अब साधना और रिसर्च के लिए खोलेंगे “श्री यूनिवर्सिटी”

State News: आज के दौर में जहां ज्यादातर युवा करियर, पैसा और लाइफस्टाइल के पीछे भाग रहे हैं, वहीं अभय सिंह की कहानी एक अलग ही दिशा दिखाती है। IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई, विदेश में शानदार नौकरी और लाखों की सैलरी—इन सबको छोड़कर उन्होंने आध्यात्म का रास्ता चुना। लेकिन उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अब यह कहानी एक नए मोड़ पर है—प्यार, शादी और फिर “स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी” के सपने तक।

IIT से अध्यात्म तक का सफर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अभय सिंह का करियर बेहद उज्ज्वल था। पढ़ाई के बाद उन्हें विदेश में हाई-पेइंग जॉब मिली। एक आम युवा के लिए यह एक ड्रीम लाइफ हो सकती थी, लेकिन अभय के मन में कुछ और ही चल रहा था।

धीरे-धीरे उनका झुकाव आध्यात्म की ओर बढ़ने लगा। उन्होंने नौकरी और भौतिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर आत्म-खोज का रास्ता चुना। इसी यात्रा ने उन्हें ‘IITian बाबा’ के रूप में पहचान दिलाई, खासकर महाकुंभ 2025 के दौरान, जहां उनकी चर्चा पूरे देश में होने लगी।

आश्रम में मुलाकात और प्यार

महाकुंभ के बाद अभय सिंह आध्यात्मिक साधना के लिए ईशा योग केंद्र पहुंचे। यह वही स्थान है जहां प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव का आश्रम स्थित है।

यहीं उनकी मुलाकात बेंगलुरु की इंजीनियर प्रीतिका से हुई। बताया जाता है कि दोनों की पहली बातचीत आदियोगी प्रतिमा के पास हुई। आध्यात्मिक माहौल में शुरू हुई यह मुलाकात धीरे-धीरे एक गहरे रिश्ते में बदल गई।

महाशिवरात्रि पर शादी

कुछ समय तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया। 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के एक मंदिर में उनकी शादी संपन्न हुई। इसके बाद 19 फरवरी को दोनों ने कोर्ट मैरिज भी कर ली।

शादी के बाद यह जोड़ा फिलहाल हिमाचल प्रदेश में रह रहा है और अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर चुका है।

अब ‘श्री यूनिवर्सिटी’ का सपना

अभय सिंह और उनकी पत्नी प्रीतिका अब सिर्फ एक साधारण जीवन नहीं जीना चाहते, बल्कि वे समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने “श्री यूनिवर्सिटी” नाम से एक संस्थान खोलने की योजना बनाई है।

इस यूनिवर्सिटी का उद्देश्य पारंपरिक शिक्षा से हटकर आध्यात्मिक साधना, ध्यान, और रिसर्च को बढ़ावा देना होगा। यहां लोगों को केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मिक विकास और जीवन के गहरे अर्थ को समझने की शिक्षा दी जाएगी।

अभय सिंह का मानना है कि प्राचीन भारतीय ऋषि परंपरा और आधुनिक विज्ञान को एक साथ लाकर एक नई शिक्षा प्रणाली विकसित की जा सकती है। उनका लक्ष्य है कि यहां आने वाले लोग “स्पिरिचुअल रिसर्चर” बनें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।

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क्यों खास है यह कहानी?

‘IITian बाबा’ की यह कहानी इसलिए खास है क्योंकि यह पारंपरिक सोच को चुनौती देती है। जहां एक ओर लोग करियर और पैसे को ही सफलता मानते हैं, वहीं अभय सिंह ने आत्म-संतोष और आध्यात्म को प्राथमिकता दी।

और अब, जब उनकी जिंदगी में प्यार और शादी का नया अध्याय जुड़ चुका है, तो उनका विजन और भी बड़ा हो गया है। यह कहानी दिखाती है कि आधुनिक शिक्षा और आध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं।

अभय सिंह की यात्रा IIT के क्लासरूम से लेकर आश्रम की शांति तक और अब एक यूनिवर्सिटी के सपने तक पहुंच चुकी है। यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी सिखाती है कि जीवन का असली उद्देश्य केवल सफलता नहीं, बल्कि संतुलन और आत्मिक संतुष्टि भी है।

आने वाले समय में “श्री यूनिवर्सिटी” का सपना कितना सफल होता है, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन इतना तय है कि ‘IITian बाबा’ की यह कहानी लोगों को लंबे समय तक सोचने पर मजबूर करती रहेगी।

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