New Delhi News: यूएन में भारत ने कहा- पाकिस्तान में लोकतंत्र महज मुखौटा, वहां सेना ही कानून
New Delhi News:संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दुष्प्रचार और भ्रामक दावों को ध्वस्त करते हुए उसे पूरी दुनिया के सामने बेनकाब किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति (कानूनी मामलों की समिति) में ‘राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून का शासन’ एजेंडे पर चर्चा के दौरान, भारतीय मिशन में काउंसलर आर. मैथिली ने पाकिस्तान के बयानों का खंडन करते हुए भारत का ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ (जवाब देने का अधिकार) पेश किया।
यूएन स्थित भारतीय मिशन के एक बयान के अनुसार, मैथिली ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि यह बेहद हास्यास्पद है कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान दूसरों को ‘कानून के शासन’ का उपदेश देता है, जबकि उसके अपने ही देश का रिकॉर्ड इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा पाकिस्तान में लोकतंत्र महज एक मुखौटा है, वहां असल में सेना ही शासन है और सेना ही कानून है। भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कुचलने, सैन्य अदालतों में नागरिकों पर मुकदमे चलाने और राजनीतिक विपक्ष व जनता की आवाज़ को बेरहमी से दबाने का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा भारत पर उंगली उठाना असल में अपने ही देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन और प्रेस की आजादी पर लगे कड़े प्रतिबंधों से दुनिया का ध्यान भटकाने की एक हताश और नाकाम कोशिश है।
छठी समिति से इतर, संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति (निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा) की बैठक में भी भारत ने पाकिस्तान को उसकी सीमाओं में रहने की चेतावनी दी। भारतीय मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी अनमोल शेर सिंह बेदी ने पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग और कश्मीर राग का करारा जवाब दिया। उन्होंने याद दिलाया कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों (मुख्य रूप से पर्यटकों) की हत्या के जवाब में भारत ने आत्मरक्षा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की यह सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से एक नपी-तुली, सटीक, लक्षित और तनाव न बढ़ाने वाली आत्मरक्षा की प्रतिक्रिया थी, जिसने आतंकी बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद कर दिया। भारत ने दो टूक कहा कि वह किसी भी सीमा पार आतंकवाद या परमाणु धमकी के आगे कभी नहीं झुकेगा।



