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PM Modi Sayoni Ghosh Meeting: PM मोदी से मिलीं सायोनी घोष और काकोली, तस्वीर शेयर कर क्या दिया संकेत? कांथा कढ़ाई की भी चर्चा

सायोनी घोष ने पीएम मोदी के साथ अपनी पहली मुलाकात को यादगार बताया, जबकि काकोली घोष दस्तीदार ने बंगाल की कांथा कढ़ाई प्रधानमंत्री को दिखाई।

PM Modi Sayoni Ghosh Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी सांसद सायोनी घोष और डॉ. काकोली घोष दस्तीदार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। दोनों सांसदों ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीरें साझा की हैं। खास बात यह है कि सायोनी घोष ने पीएम मोदी के साथ मुलाकात को अपनी पहली मुलाकात बताते हुए इसे यादगार पल करार दिया। वहीं डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने प्रधानमंत्री को बंगाल की पारंपरिक कांथा कढ़ाई से रूबरू कराया और इस कला से जुड़े बुनकरों के लिए समर्थन की बात सामने रखी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2026 में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े उन सांसदों से मुलाकात की, जो एनडीए के साथ राजनीतिक रूप से जुड़े हुए हैं। इसी क्रम में सायोनी घोष और डॉ. काकोली घोष दस्तीदार की भी प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद दोनों सांसदों की ओर से तस्वीरें साझा किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

सायोनी घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी तस्वीर साझा की। उन्होंने तस्वीर के साथ लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेरी पहली मुलाकात। याद रखने वाला पल!” सायोनी घोष की इस पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। खास तौर पर इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री के साथ उनकी यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब वह और डॉ. काकोली घोष दस्तीदार समेत कई सांसद एनडीए के साथ राजनीतिक रूप से जुड़े हुए हैं।

हालांकि, सिर्फ तस्वीर साझा किए जाने को किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। सायोनी घोष की पोस्ट में मुलाकात को लेकर कोई राजनीतिक घोषणा या भविष्य की रणनीति का स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है। ऐसे में फिलहाल इसे प्रधानमंत्री और सांसदों के बीच हुई औपचारिक मुलाकात के तौर पर ही देखा जा रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर तस्वीर और उसके साथ लिखे संदेश ने इस मुलाकात को जरूर चर्चा का विषय बना दिया है।

दूसरी ओर डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान बंगाल की पारंपरिक कांथा कढ़ाई भी दिखाई। उन्होंने बताया कि वह कोलकाता से बंगाल की प्रसिद्ध कांथा कढ़ाई लेकर पहुंची थीं। प्रधानमंत्री ने इस पारंपरिक कला को देखा और इसकी सराहना की। काकोली घोष दस्तीदार के मुताबिक प्रधानमंत्री ने बंगाल के बुनकरों और हथकरघा क्षेत्र को समर्थन देने का भरोसा भी दिलाया।

कांथा कढ़ाई बंगाल की पारंपरिक हस्तकला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाथ से की जाने वाली इस कढ़ाई में कपड़े पर अलग-अलग तरह के डिजाइन और आकृतियां उकेरी जाती हैं। बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री के सामने कांथा कढ़ाई को प्रस्तुत करना हथकरघा और पारंपरिक शिल्प से जुड़े मुद्दों को सामने रखने का एक अवसर भी माना जा रहा है।

यह मुलाकात नेशनल हैंडलूम डे के आसपास हुई गतिविधियों से भी जुड़ी है। इस दौरान हथकरघा और पारंपरिक भारतीय वस्त्रों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार देश के पारंपरिक कारीगरों और बुनकरों के उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील करते रहे हैं। ऐसे में बंगाल की कांथा कढ़ाई को प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुत किए जाने को सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

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इससे पहले 7 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 45 सांसदों के साथ नाश्ते पर बैठक की थी। इस बैठक में अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े सांसद शामिल हुए थे। इनमें शिवसेना के सात सांसद, एनसीपी से जुड़े सांसद और उपेंद्र कुशवाहा समेत अन्य नेता शामिल थे। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनके संसदीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों के बारे में जानकारी ली।

बैठक में प्रधानमंत्री ने सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने सांसदों से उपलब्ध सरकारी संसाधनों और अपने अधिकारों का प्रभावी इस्तेमाल करने को कहा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगर किसी क्षेत्र से जुड़ी विकास योजना को लेकर आवश्यकता हो तो सांसद प्रधानमंत्री कार्यालय से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने सांसदों को अपने क्षेत्रों के लोगों से लगातार संपर्क में रहने की सलाह भी दी। उन्होंने खास तौर पर गरीबों, मजदूरों और किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और जमीनी स्थिति की जानकारी लेने पर जोर दिया। उनका संदेश था कि सांसदों को सिर्फ संसद की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने संसदीय क्षेत्रों में भी सक्रिय रहना चाहिए।

सायोनी घोष और काकोली घोष दस्तीदार के साथ प्रधानमंत्री की मुलाकात इसी व्यापक संवाद प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है। तस्वीरों के सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं जरूर तेज हुई हैं, लेकिन दोनों सांसदों की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है जिससे किसी नई राजनीतिक घोषणा की पुष्टि होती हो। फिलहाल सायोनी घोष ने इस मुलाकात को अपनी पहली और यादगार मुलाकात बताया है, जबकि काकोली घोष दस्तीदार ने बंगाल की कांथा कढ़ाई और बुनकरों से जुड़ा मुद्दा प्रधानमंत्री के सामने रखा है।

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