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उद्यमिता से जुड़ने पर बढ़ेगी गांव की आय : नवनीत सहगल

लखनऊ। अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम डा. नवनीत सहगल ने गैर कृषि क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय सलाहकार समिति के बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। खेती-किसाने से जुड़े ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्हें उद्यमिता के साथ जोड़ना होगा। इसमें नाबार्ड जैसी संस्थाओं का महत्पूर्ण योगदान होगा। इसके लिए उन्होंने खादी ग्रामोद्योग, एमएसएमई, निर्यात प्रोत्साहन तथा नाबार्ड का एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर विशेष बल भी दिया।

अपर मुख्य सचिव ने गोमती नगर स्थित नाबार्ड कार्यालय में आयोजित बैठक में कहा कि सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दे रही है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा एमएसएमई हैं। इसमें सूक्ष्म और लघु उद्यमों की संख्या सबसे अधिक है। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों की आय को बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खादी, हैण्डलूम और एमएसएमई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां रोजगार से सबसे अधिक संभावनाएं है। छोटे-छोटे उद्यमियों को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर उनके रोजगार को बढ़ाया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाये नाबार्ड, राज्य सरकार करेगी पूरा सहयोग – डॉ सहगल

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में नाबार्ड को सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के साथ अन्य व्यवसायिक गतिविधयां संचालित करे, राज्य सरकार इसमें पूरा सहयोग प्रदान करेगी।

गैर कृषि क्षेत्र उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा नाबार्ड – डी एस चौहान

नाबार्ड के महा प्रबंधक डी0एस0 चौहान ने कहा कि नाबार्ड द्वारा गैर कृषि क्षेत्र से जुड़े कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण विकास में नाबार्ड की शुरू से ही रही है। किसानों की आय का 70 फीसदी हिस्सा गैर कृषि से आता है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा ग्रामीण के कौशल विकास हेतु महत्वपूर्ण गतिविधियों को चिहिन्त किया गया है। नाबार्ड द्वारा कौशल विकास के लिए ग्रांट एवं मैनेजमेंट पर आधारित कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।

पिछले वर्ष इन कार्यक्रमों के अन्तर्गत 40 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई थी। इस वर्ष 100 करोड़ रुपये ग्रांट देने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों की 150 महिलाओं को सैनेट्री नैपकीन बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग के बाद महिलाओं को नैपकीन बनाने की मशीन लीज पर दी जायेगी। साथ ही बाई-बैक एग्रीमेंट भी किया जायेगा। इससे महिलाओं की प्रतिमाह चार से छः हजार रुपये अतिरिक्त आमदनी होगी।

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