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Robot Cleaner: घर की सफाई खुद कैसे करता है रोबोट? जानिए सेंसर, लेजर और AI की पूरी तकनीक

Robot Cleaner: कमरे का नक्शा बनाने से लेकर धूल खींचने और पोछा लगाने तक, स्मार्ट रोबोट कई तकनीकों की मदद से करता है सफाई।

Robot Cleaner:  त्योहारों का मौसम आते ही घरों की साफ-सफाई का काम तेज हो जाता है। खासकर दिवाली से पहले लोग घर के हर कोने को चमकाने में जुट जाते हैं। हालांकि, पूरे घर की सफाई करना आसान नहीं होता। इसमें काफी समय और मेहनत लगती है। ऐसे में अब तकनीक ने इस काम को भी आसान बना दिया है। बाजार में मौजूद रोबोटिक क्लीनर बिना किसी की मदद के घर में झाड़ू लगाने और पोछा करने का काम कर सकते हैं।

आकार में छोटे दिखने वाले ये रोबोट कई आधुनिक तकनीकों से लैस होते हैं। ये घर के कमरों का नक्शा तैयार कर सकते हैं, रास्ते में आने वाले फर्नीचर और दूसरी चीजों से बचकर निकलते हैं और सीढ़ियों के पास पहुंचते ही अपनी दिशा बदल लेते हैं। इतना ही नहीं, सफाई पूरी होने या बैटरी कम होने पर ये खुद चार्जिंग स्टेशन तक भी पहुंच जाते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर इन स्मार्ट क्लीनर के पीछे कौन-सी तकनीक काम करती है।

1. LiDAR तकनीक से तैयार होता है घर का नक्शा

रोबोटिक क्लीनर की सबसे खास विशेषताओं में से एक है उसकी मैपिंग तकनीक। इसके लिए कई आधुनिक मॉडल में LiDAR यानी लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है। यह तकनीक लेजर की मदद से आसपास मौजूद वस्तुओं की दूरी मापती है।

जब रोबोट सफाई शुरू करता है तो उसका सेंसर कमरे की दीवारों, सोफे, बेड, टेबल और दूसरी चीजों की स्थिति का पता लगाता है। इन जानकारियों के आधार पर मशीन अपने अंदर घर का डिजिटल नक्शा तैयार कर लेती है। इससे उसे यह समझने में मदद मिलती है कि किस रास्ते से जाना है और किन जगहों की सफाई अभी बाकी है।

LiDAR के अलावा कुछ रोबोट कैमरा और दूसरे नेविगेशन सेंसर का भी इस्तेमाल करते हैं। यानी सभी रोबोटिक क्लीनर में एक जैसी मैपिंग तकनीक नहीं होती।

2. सेंसर की मदद से टकराने और गिरने से बचता है रोबोट

रोबोटिक क्लीनर को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि सफाई करते समय वह घर के सामान से न टकराए। इसके लिए इसमें एंटी-कोलिजन सेंसर लगाए जाते हैं। ये सामने आने वाली बाधाओं का पता लगाकर रोबोट को धीमा करने या उसकी दिशा बदलने में मदद करते हैं।

वहीं, मशीन के निचले हिस्से में लगे क्लिफ सेंसर सीढ़ियों या ऊंचाई वाले किनारों का पता लगाते हैं। जैसे ही रोबोट को सामने फर्श का स्तर नीचे जाता हुआ महसूस होता है, वह आगे बढ़ना रोक देता है और दूसरी दिशा में मुड़ जाता है। इसी वजह से वह सीढ़ियों से नीचे गिरने से बच सकता है।

3. वैक्यूम मोटर और ब्रश से खींचता है धूल-मिट्टी

घर का नक्शा तैयार करने के बाद रोबोट सफाई का काम शुरू करता है। इसके निचले हिस्से में छोटे साइड ब्रश लगे होते हैं, जो दीवारों के किनारों और कोनों में जमा धूल व कचरे को मशीन के मुख्य हिस्से की तरफ पहुंचाते हैं।

इसके बाद बीच में लगा रोलर ब्रश और वैक्यूम मोटर अपना काम करते हैं। मोटर की सक्शन पावर यानी खींचने की क्षमता धूल, बाल और छोटे कणों को अंदर खींच लेती है। यह कचरा मशीन में मौजूद डस्टबिन में जमा हो जाता है।

इस तरह रोबोट बिना किसी व्यक्ति के हाथ लगाए फर्श पर झाड़ू लगाने जैसा काम कर पाता है।

4. माइक्रोफाइबर पैड से लगाता है पोछा

सिर्फ धूल हटाना ही नहीं, कई रोबोटिक क्लीनर पोछा लगाने में भी सक्षम होते हैं। इसके लिए इनमें पानी रखने का छोटा टैंक और नीचे माइक्रोफाइबर पैड लगाया जाता है।

मशीन सफाई के दौरान पैड को नियंत्रित मात्रा में गीला रखती है और उसे फर्श पर चलाकर पोछा लगाती है। कुछ मॉडल में पानी की मात्रा को ऐप या मशीन की सेटिंग के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।

नए और महंगे मॉडल में कारपेट डिटेक्शन सेंसर भी मिलते हैं। ये कालीन की पहचान कर सकते हैं। कुछ मॉडल कालीन पर पहुंचने पर मॉपिंग पैड को ऊपर उठा लेते हैं, ताकि कालीन गीला न हो। हालांकि, यह सुविधा हर रोबोट में उपलब्ध नहीं होती।

5. मोबाइल ऐप से कहीं से भी कर सकते हैं कंट्रोल

रोबोटिक क्लीनर को चलाने के लिए हर बार उसके पास खड़े रहने की जरूरत नहीं होती। अधिकतर स्मार्ट मॉडल Wi-Fi के जरिए मोबाइल ऐप से कनेक्ट हो जाते हैं।

ऐप की मदद से यूजर सफाई शुरू या बंद कर सकता है और यह भी देख सकता है कि रोबोट ने घर के किन हिस्सों की सफाई पूरी कर ली है। कई मॉडल में कमरे के हिसाब से सफाई का विकल्प भी मिलता है।

इसके अलावा No-Go Zones बनाने की सुविधा भी दी जाती है। इसके जरिए यूजर घर के कुछ हिस्सों को सफाई के दायरे से बाहर रख सकता है। उदाहरण के लिए पूजा घर, बच्चों के खिलौनों वाला हिस्सा या कोई ऐसा स्थान जहां रोबोट को नहीं भेजना हो।

6. बैटरी कम होते ही खुद पहुंचता है चार्जिंग स्टेशन

रोबोटिक क्लीनर की एक और उपयोगी खासियत इसका ऑटोमैटिक चार्जिंग सिस्टम है। सफाई के दौरान जब बैटरी कम होने लगती है तो कई मॉडल खुद अपने चार्जिंग डॉक की तरफ लौट जाते हैं।

बैटरी चार्ज होने के बाद कुछ रोबोट उसी जगह से सफाई दोबारा शुरू कर सकते हैं, जहां उन्होंने काम रोका था। इससे बड़े घरों की सफाई में भी मशीन को बार-बार मैन्युअली चलाने की जरूरत नहीं पड़ती।

तकनीक और सेंसर मिलकर बनाते हैं स्मार्ट सफाईकर्मी

रोबोटिक क्लीनर की कार्यप्रणाली केवल एक सेंसर या मोटर पर निर्भर नहीं करती। इसमें नेविगेशन सिस्टम, लेजर या कैमरा, एंटी-कोलिजन सेंसर, क्लिफ सेंसर, वैक्यूम मोटर, ब्रश और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम मिलकर काम करते हैं।

यही तकनीक इसे घर के अलग-अलग हिस्सों में रास्ता पहचानने, धूल साफ करने, पोछा लगाने और जरूरत पड़ने पर खुद चार्ज होने में सक्षम बनाती है। हालांकि, बेहतर सफाई के लिए समय-समय पर इसके ब्रश, फिल्टर और डस्टबिन की सफाई करना भी जरूरी होता है।

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