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कबाड़ बेचकर करोड़पति हो गया उत्तर रेलवे, कायम किया नया रिकॉर्ड

लखनऊ : रेलवे में जो सामान काम का नहीं बचता है उसे कबाड़ घोषित कर दिया जाता है और बिक्री के लिए एक तरफ इकट्ठा कर दिया जाता है. यही स्क्रैप उत्तर रेलवे के लिए राजस्व का बड़ा जरिया साबित हुआ है. कबाड़ बेचकर उत्तर रेलवे करोड़पति हो गया है. पिछले साल की तुलना में इस साल कहीं ज्यादा कमाई हुई है. कबाड़ की रिकॉर्ड बिक्री कर उत्तर रेलवे ने रिकॉर्ड बना लिया है. उत्तर रेलवे जीरो स्क्रैप स्टेटस हासिल करने और इस वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक स्क्रैप बिक्री रिकॉर्ड स्थापित करने के लिए मिशन मोड में कार्य कर अपने परिसरों को साफ सुथरा कर रहा है.

उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक शोभन चौधरी ने बताया कि उत्तर रेलवे ने स्क्रैप बिक्री में एक नया रिकॉर्ड बनाया है. 21 अगस्त को की गई नीलामी के बाद उत्तर रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 200.20 करोड़ रुपए अर्जित किए, जो अगस्त तक के आनुपातिक लक्ष्य 183 करोड़ रुपये से अधिक है. इस तरह उत्तर रेलवे स्क्रैप का निपटान कर भारतीय रेल की सभी क्षेत्रीय रेलों और उत्पादन इकाइयों में पहले स्थान पर रहा है.
यह पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में की गई स्क्रैप बिक्री से 37.69% अधिक है. उत्तर रेलवे पिछली जून में 100 करोड़ रुपये की स्क्रैप बिक्री करके भी पहले स्थान पर रहा है. स्क्रैप से राजस्व अर्जित किए जाने के साथ-साथ, यह परिसरों को साफ-सुथरा बनाए रखने में भी मदद करता है. रेल पटरियों के टुकड़े, स्लीपर, टाई बार स्क्रैप को इकट्ठा कर इसकी विक्री से संरक्षा बढ़ाने में मदद मिलती है. उत्तर रेलवे ने स्टॉफ क्वाटरों, केबिनों, शैड़ों, वाटर टैंकों आदि परित्यक्त ढांचों के निपटान के कार्य को मिशन मोड में शुरू किया है. इससे न सिर्फ राजस्व बढ़ाने में मदद मिली है बल्कि कीमती स्थान की उपलब्धता भी सुनिश्चित हुई है. इससे शरारती तत्वों के पुराने ढांचों के दुरुपयोग की संभावना भी खत्म होती है.

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