adevertisment Adevertiisment banner

Anurag Thakur : ‘आजीवन प्रतिबंध का न इरादा था, न जरूरत’, सुप्रीम कोर्ट से अनुराग ठाकुर को मिली राहत

Anurag Thakur : सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर पर बीसीसीआई मामलों में लगा बैन हटाया। कोर्ट ने कहा– आजीवन प्रतिबंध का न इरादा था, न जरूरत; 2017 के आदेश में संशोधन।

Anurag Thakur : सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से जुड़े मामलों में अनुराग सिंह ठाकुर पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उन पर जिंदगी भर का प्रतिबंध लगाने का न तो कोई इरादा था और न ही इसकी आवश्यकता थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली पीठ ने इसे आनुपातिकता के सिद्धांत का उपयुक्त मामला बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2 जनवरी 2017 के फैसले में संशोधन करते हुए कहा कि अनुराग ठाकुर अब बीसीसीआई के नियमों और विनियमों के अनुसार बोर्ड से जुड़े मामलों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र होंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2017 के फैसले के निर्देश संख्या 3 और 4 पहले ही वापस लिए जा चुके थे और मौजूदा याचिका केवल प्रतिबंध से संबंधित थी।

नौ साल से लागू था प्रतिबंध

सुनवाई के दौरान अनुराग ठाकुर के वकील ने दलील दी कि यह प्रतिबंध करीब **नौ वर्षों से लागू** था और इसे जारी रखना उनके लिए गंभीर कठिनाइयों का कारण बन रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रतिबंध को अनिश्चित काल तक बनाए रखना न्यायसंगत नहीं होगा।

बिना शर्त माफी पहले ही स्वीकार कर चुका था कोर्ट

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुराग ठाकुर पहले ही **बिना शर्त माफी** मांग चुके थे, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। वर्ष 2017 में अदालत ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने से जुड़े मामले में उनके खिलाफ अवमानना की संभावित कार्रवाई को लेकर नोटिस जारी किया था।

2016 में बने थे बीसीसीआई अध्यक्ष

गौरतलब है कि अनुराग ठाकुर 2016 में बीसीसीआई के अध्यक्ष बने थे, लेकिन लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू न करने के कारण उन्हें पद से हटा दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद वे बीसीसीआई की गतिविधियों में फिर से सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे, बशर्ते वे बोर्ड के मौजूदा नियमों का पालन करें।

अदालत के इस फैसले को भारतीय क्रिकेट प्रशासन में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

Related Articles

Back to top button