National News: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफे पर तोड़ी चुप्पी: बीमार नहीं था, स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी

National News:  भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar ने अपने अचानक दिए गए इस्तीफे को लेकर पहली बार खुलकर बयान दिया है। राजस्थान के चूरू दौरे के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए पद छोड़ा था, न कि किसी गंभीर बीमारी के कारण। उनके इस बयान ने उस राजनीतिक बहस को फिर से हवा दे दी है, जो उनके इस्तीफे के बाद से जारी थी।


इस्तीफा क्यों बना था बड़ा राजनीतिक मुद्दा?

जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल 2027 तक निर्धारित था, इसलिए बीच कार्यकाल में दिया गया यह त्यागपत्र चौंकाने वाला माना गया।

इस्तीफे के पत्र में उन्होंने लिखा था कि वे “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने” के लिए पद छोड़ रहे हैं। इसी बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या वे गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।

अब चूरू में उन्होंने साफ कहा:

“मैंने कभी नहीं कहा कि मैं बीमार था। मैंने कहा था कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।”


राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल

इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि देश के उपराष्ट्रपति का अचानक इस्तीफा देना और फिर लंबे समय तक चुप रहना कई सवाल खड़े करता है।

राहुल गांधी ने यह भी संकेत दिया था कि इस्तीफे के पीछे “कोई बड़ी वजह” हो सकती है। उनके इन बयानों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया था।

धनखड़ के हालिया बयान को इन सवालों का अप्रत्यक्ष जवाब माना जा रहा है।


चूरू दौरे का संदर्भ

राजस्थान के चूरू जिले के दौरे के दौरान धनखड़ ने न सिर्फ अपने इस्तीफे पर सफाई दी, बल्कि इसे व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से जुड़ा फैसला बताया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में भी स्वास्थ्य सर्वोपरि होता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके निर्णय को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया गया। चूरू में उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राजस्थान उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा राज्य रहा है।


संवैधानिक पद और राजनीतिक संदेश

उपराष्ट्रपति का पद भारतीय संविधान में अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे पद से अचानक इस्तीफा देना स्वाभाविक रूप से चर्चा और विश्लेषण का विषय बनता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • बीच कार्यकाल इस्तीफा हमेशा राजनीतिक संकेत देता है।

  • स्वास्थ्य का हवाला देने से पारदर्शिता को लेकर बहस होती है।

  • विपक्ष और सत्ता पक्ष इसे अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से देखते हैं।

धनखड़ के बयान से यह स्पष्ट संदेश गया है कि वे अपने निर्णय को व्यक्तिगत और स्वास्थ्य से जुड़ा मानते हैं, न कि राजनीतिक दबाव का परिणाम।

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आगे क्या?

धनखड़ के बयान के बाद राजनीतिक बहस को नया मोड़ मिल सकता है। हालांकि उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन विपक्ष भविष्य में इस मुद्दे को फिर उठा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला अब ज्यादा संवैधानिक पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही की बहस से जुड़ सकता है।

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने साफ कर दिया है कि उनका इस्तीफा बीमारी के कारण नहीं बल्कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के निर्णय का परिणाम था। राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों और चूरू में दिए गए उनके बयान ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।

अब देखना यह होगा कि क्या यह स्पष्टीकरण राजनीतिक विवाद को शांत करता है या आने वाले समय में यह विषय फिर से राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनेगा।

Written By: Anushri Yadav

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