National News: तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! क्या आपसी सहमति से हुए डिवोर्स से पीछे हट सकते हैं?
Supreme Court ने साफ किया—अंतिम डिक्री के बाद सहमति वापस लेना संभव नहीं, जानिए पूरा मामला
National News: Supreme Court of India ने तलाक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है, जो देशभर के लाखों दंपतियों के लिए बेहद अहम है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आपसी सहमति से तलाक (Mutual Divorce) के मामलों में एक सीमा के बाद पति या पत्नी अपनी सहमति वापस नहीं ले सकते।
यह फैसला न सिर्फ कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी बताता है कि समझौते और मध्यस्थता की प्रक्रिया को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
कब तक वापस ली जा सकती है सहमति?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जब तक तलाक की अंतिम डिक्री (Final Decree) पास नहीं होती, तब तक दोनों पक्षों के पास अपनी सहमति वापस लेने का अधिकार होता है।
लेकिन एक बार जब कोर्ट द्वारा सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाती हैं और तलाक की अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तब किसी भी पक्ष के लिए पीछे हटना संभव नहीं होता।
यह फैसला इस बात को सुनिश्चित करता है कि कोर्ट में किए गए समझौते स्थिर और भरोसेमंद बने रहें।
23 साल बाद तलाक और फिर विवाद
इस मामले की पृष्ठभूमि भी काफी दिलचस्प और जटिल रही। शादी साल 2000 में हुई थी और करीब 23 साल बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता (Mediation) के लिए भेजा, जहां काउंसिलिंग के दौरान दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने और सभी विवादों को सुलझाने का निर्णय लिया।
दोनों पक्षों के बीच एक विस्तृत समझौता भी हुआ, जिसमें वित्तीय लेन-देन और अन्य शर्तें शामिल थीं।
करोड़ों का लेन-देन और फिर पलटी कहानी
समझौते के तहत पति ने पत्नी को करीब 1.5 करोड़ रुपये दो किश्तों में दिए, साथ ही कार के लिए 14 लाख रुपये और कुछ गहने भी दिए गए।
वहीं पत्नी ने भी जॉइंट अकाउंट से 2.5 करोड़ रुपये पति को ट्रांसफर करने पर सहमति जताई। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया और समझौते की शर्तों को पूरा किया।
लेकिन बाद में पत्नी ने अपनी सहमति वापस लेने की कोशिश की और Domestic Violence Act के तहत शिकायत दर्ज करा दी, जिस पर मजिस्ट्रेट ने समन भी जारी कर दिए।
कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
इस पूरे मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच—Justice Rajesh Bindal और Justice Vijay Bishnoi—ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर लेते हैं और उसके आधार पर तलाक हो जाता है, तो बाद में उस समझौते से पीछे हटना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।
बिना वजह पीछे हटने पर लग सकता है जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई पक्ष बिना उचित कारण के समझौते से पीछे हटता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
इसका उद्देश्य यह है कि लोग मध्यस्थता और समझौते की प्रक्रिया का दुरुपयोग न करें और न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।
पत्नी की दलील पर कोर्ट की टिप्पणी
पत्नी ने अपनी सहमति वापस लेने के पीछे यह तर्क दिया कि पति ने उसे भारी मात्रा में गहने और सोना देने का वादा किया था, जिसे समझौते में शामिल नहीं किया गया।
इस दलील पर कोर्ट ने सख्त आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह के आरोप न्याय प्रणाली का अनादर हैं और इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।
क्या सीख मिलती है इस फैसले से?
इस फैसले से साफ हो गया है कि आपसी सहमति से तलाक कोई हल्की प्रक्रिया नहीं है। यह एक गंभीर कानूनी समझौता है, जिसे पूरी जिम्मेदारी और सोच-समझकर ही करना चाहिए।
एक बार सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो जाने के बाद पीछे हटने की गुंजाइश नहीं रहती। इसलिए हर पक्ष को अपने निर्णय के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होना चाहिए।
Supreme Court of India का यह फैसला न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह न केवल तलाक से जुड़े मामलों में स्पष्टता लाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि अदालत में किए गए समझौते स्थायी और विश्वसनीय बने रहें।
Written By: Anushri Yadav



