Global News: मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव! पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल, भारत की कूटनीति फिर चर्चा में
Iran-United States तनाव के बीच India की संतुलित कूटनीति बनी चर्चा का केंद्र, पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
Global News: मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। United States और Iran के बीच हुए सीजफायर को अभी 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि तनाव फिर बढ़ने लगा। इस पूरे घटनाक्रम में Pakistan की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि India की संतुलित नीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
सीजफायर के बाद भी क्यों भड़का विवाद?
सीजफायर के बावजूद Israel द्वारा लेबनान में किए गए हमलों ने हालात को फिर से तनावपूर्ण बना दिया। इसके जवाब में ईरान के प्रभावशाली संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने का संकेत दिया। यह इलाका वैश्विक तेल सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है, ऐसे में इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय चिंता और बढ़ा दी है।
वहीं, Donald Trump ने भी साफ कर दिया है कि अगर पूर्ण समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खाड़ी क्षेत्र में बनी रहेगी, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
पाकिस्तान पर क्यों उठे सवाल?
इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सबसे ज्यादा विवाद देखने को मिल रहा है। इजरायल की तरफ से भारत में उसके राजदूत Reuven Azar ने साफ तौर पर कहा कि वे पाकिस्तान को भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं मानते। उनके अनुसार, अमेरिका ने अपने रणनीतिक हितों के चलते पाकिस्तान का इस्तेमाल किया हो सकता है, लेकिन इसे एक विश्वसनीय खिलाड़ी नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में मध्यस्थ की विश्वसनीयता बेहद जरूरी होती है, और यही वह बिंदु है जहां पाकिस्तान सवालों के घेरे में आ गया है।
ईरान ने भारत की क्यों की तारीफ?
दूसरी ओर, भारत को लेकर Iran का रुख बेहद सकारात्मक नजर आया। ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधि Majid Hakim Elahi ने भारतीय नेतृत्व और लोगों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि Narendra Modi और S. Jaishankar ने लगातार संवाद बनाए रखा, जो कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है।
उन्होंने भारतीयों को “असाधारण” बताते हुए कहा कि भारत के लोगों के प्रति उनका भावनात्मक जुड़ाव है। खास बात यह रही कि उन्होंने पाकिस्तान का नाम लेने से भी परहेज किया, जो अपने आप में एक संकेत माना जा रहा है।
Global Crisis : होर्मुज संकट का असर इंटरनेट पर भी! भारत समेत दुनिया में स्लो हो सकती है स्पीड
भारत की नीति क्यों अलग है?
अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत का रुख हमेशा संतुलित और कूटनीतिक रहा है। भारत न तो सीधे किसी पक्ष में खड़ा होता है और न ही बिना जरूरत मध्यस्थता करता है। उसकी प्राथमिकता हमेशा संवाद और शांति रही है।
चाहे Russia-Ukraine War हो या फिर अमेरिका-ईरान तनाव—भारत ने हर स्थिति में दोनों पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखा, लेकिन किसी पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश नहीं की। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में देखा जाता है।
आगे क्या?
मध्य पूर्व में मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि स्थिति अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है। सीजफायर के बावजूद घटनाएं जिस तेजी से बदल रही हैं, उससे आने वाले दिनों में और तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि भरोसा और संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। जहां एक ओर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं भारत की शांत और स्थिर कूटनीति उसे एक अलग पहचान दे रही है।
मध्य पूर्व के इस जटिल समीकरण में जहां कई देश अपनी-अपनी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वहीं भारत की “बातचीत और संतुलन” वाली नीति उसे एक मजबूत और सम्मानित स्थिति में खड़ा करती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत इस संकट में और बड़ी भूमिका निभाता है या अपनी पारंपरिक नीति पर कायम रहता है।



